मुजफ्फरपुर: 11 साल पुराने रिश्वतखोरी के मामले में विशेष निगरानी कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सीतामढ़ी के तत्कालीन राष्ट्रीय बचत कार्यपालक पदाधिकारी प्रदीप कुमार को दोषी करार देते हुए विशेष कोर्ट निगरानी के न्यायाधीश दशरथ मिश्रा ने पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. प्रदीप कुमार मूल रूप से नालंदा जिले के बिहारशरीफ का निवासी है.
महिला अभिकर्ता से मांगी थी रिश्वत
मामला सीतामढ़ी जिले के बेला थाना क्षेत्र के मनपौर गांव निवासी सुनील कुमार की शिकायत से जुड़ा है. शिकायत के अनुसार, उनकी पुत्री प्रियंका कुमारी राष्ट्रीय बचत वित्त विभाग के तहत डाकघर आरडी (Recurring Deposit) खातों के लिए महिला प्रधान अभिकर्ता के रूप में कार्य करती थीं.
कमीशन शुरू करने के बदले मांगे थे रुपये
शिकायत में कहा गया था कि प्रत्येक माह की पांच तारीख को विभागीय बैठक होती थी. एक बैठक में अनुपस्थित रहने के बाद बिना कोई स्पष्टीकरण मांगे उनका मासिक कमीशन बंद कर दिया गया. बाद में बंद कमीशन दोबारा शुरू करने के एवज में तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी प्रदीप कुमार ने रिश्वत की मांग की.
2014 में रंगेहाथ पकड़ा गया था आरोपी
शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले की जांच की. आरोप सही पाए जाने पर 9 दिसंबर 2014 को निगरानी की टीम ने जाल बिछाया और महिला अभिकर्ता से रिश्वत लेते हुए प्रदीप कुमार को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया था. इसके बाद उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया गया.
11 साल बाद आया कोर्ट का फैसला
करीब 11 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद विशेष निगरानी कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए पांच वर्ष के कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई. इस फैसले को भ्रष्टाचार के मामलों में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है.
यह भी पढे़ं: "मेरी बेटी सुसाइड नहीं कर सकती...", रेड लाइट एरिया की नर्तकी की मौत, मामला उलझा
