मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: जिला स्वास्थ्य विभाग की दो बड़ी संस्थाओं में मोतियाबिंद के इलाज को लेकर बड़ा विरोधाभास सामने आया है. एक तरफ जहां एसकेएमसीएच में मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं, वहीं दूसरी तरफ सदर अस्पताल की ‘आई ओटी’ (आई ऑपरेशन थिएटर) मरीजों की राह देख रही है.
5 महीने में SKMCH में 95 तो सदर में सिर्फ 1 ऑपरेशन
आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से मई तक एसकेएमसीएच में 95 मरीजों का सफल ऑपरेशन किया जा चुका है. इसके उलट सदर अस्पताल की आई ओटी में इस अवधि में मात्र 1 ही ऑपरेशन हो सका है.
लेंस की कमी और डॉक्टरों का टोटा मुख्य वजह
अस्पताल के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, सदर अस्पताल में ऑपरेशन ठप होने का मुख्य कारण बार-बार लेंस का खत्म होना है. पिछले एक साल में कई बार लेंस उपलब्ध न होने से मरीजों को लौटना पड़ा. इसके अलावा, अस्पताल में आंखों के दो डॉक्टर तैनात हैं, लेकिन सर्जन केवल एक ही हैं. हालांकि, सदर अस्पताल के प्रबंधक प्रवीण कुमार का दावा है कि अब पर्याप्त मात्रा में लेंस उपलब्ध हैं और डॉक्टरों को लगातार ऑपरेशन के निर्देश दिए जा रहे हैं.
ऑपरेशन के बाद बुजुर्गों की नजर कमजोर, चश्मे का ऑर्डर
एक नई समस्या यह सामने आई है कि मोतियाबिंद ऑपरेशन कराने वाले 80 प्रतिशत बुजुर्गों की नजदीक की नजर (प्रेसबायोपिक) कमजोर पाई गई है. इस समस्या से निपटने के लिए ‘अंधापन निवारण कार्यक्रम’ के तहत राज्य भर से प्रेसबायोपिक ग्लास (नजदीक का चश्मा) की मांग बढ़ गई है. स्वास्थ्य विभाग ने इसके वितरण का जिम्मा एक निजी एजेंसी को सौंपा है, जो जिलों की डिमांड पर जल्द चश्मे उपलब्ध कराएगी.
