बकरी पालकर मां ने बेटे को बनाया IAS, बचपन में छूटा पिता का साथ, मेहनत से बदल दी खानदान की किस्मत

पिता के निधन के बाद मां ने बकरी पालकर बेटे को IAS बनाया. जानें विशाल कुमार की प्रेरणादायक UPSC सफलता की कहानी, जिसमें मां की मेहनत और शिक्षक का साथ अहम रहा.

सक्सेस स्टोरी: मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड के मकसूदरपुर गांव के विशाल कुमार की UPSC सफलता की कहानी संघर्ष, मां की मेहनत और एक शिक्षक के भरोसे की कहानी है. नौवीं कक्षा में पिता को खोने के बाद परिवार की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई. मां ने बकरी पालकर घर चलाया और बेटे की पढ़ाई नहीं रुकने दी. वहीं, सरकारी स्कूल के शिक्षक गौरी शंकर ने विशाल की पढ़ाई में आर्थिक मदद करने के साथ उन्हें बड़े सपने देखने का हौसला दिया.

9वीं क्लास में पिता का निधन

विशाल कुमार का बचपन बेहद सामान्य परिस्थितियों में बीता. मुजफ्फरपुर के मीनापुर प्रखंड स्थित मकसूदरपुर गांव में उनका परिवार रहता था. पिता मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते थे. साल 2008 में जब विशाल नौवीं कक्षा में थे, तभी अचानक उनके पिता का निधन हो गया.

पिता के जाने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट आ गया. पांच सदस्यों वाले परिवार की जिम्मेदारी मां रीना देवी के कंधों पर आ गई. उन्होंने बकरी पालकर घर चलाने का फैसला लिया और बच्चों की पढ़ाई जारी रखी.

शिक्षक गौरी शंकर ने बढ़ाया मदद का हाथ

विशाल पढ़ाई में शुरू से ही होनहार थे. स्कूल में उनकी प्रतिभा को शिक्षक गौरी शंकर ने पहचाना. मुश्किल दौर में उन्होंने विशाल की आर्थिक मदद शुरू की. पढ़ाई के दौरान जब भी फीस, किताब या अन्य जरूरतों के लिए पैसे की आवश्यकता हुई, शिक्षक ने सहयोग किया.

विशाल के मुताबिक शिक्षक ने उन्हें कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि उनके पीछे कोई नहीं है. उन्होंने पढ़ाई के साथ आगे बढ़ने और बड़े लक्ष्य तय करने के लिए लगातार प्रेरित किया. UPSC की तैयारी का विचार भी शिक्षक की प्रेरणा से मजबूत हुआ.

2011 में मैट्रिक में किया टॉप

मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद विशाल ने पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन जारी रखा. साल 2011 में उन्होंने मैट्रिक बोर्ड परीक्षा में टॉप किया. इसके बाद 2013 में 12वीं की पढ़ाई पूरी की.

मेहनत का सिलसिला यहीं नहीं रुका. आगे चलकर उनका चयन IIT कानपुर में हुआ. साल 2017 में IIT से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्हें रिलायंस कंपनी में नौकरी मिल गई.

शिक्षक की सलाह बनी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट

नौकरी के दौरान विशाल कई-कई घंटे काम करते थे. इससे वह परेशान रहने लगे. उन्होंने अपनी परेशानी शिक्षक गौरी शंकर को बताई. शिक्षक ने उन्हें नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी करने की सलाह दी.

विशाल ने जोखिम उठाया और नौकरी छोड़ दी. इसके बाद कोटा में रहकर UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. यही फैसला उनके जीवन का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.

पहली बार मेन्स में असफल, दूसरी बार बने IAS

विशाल ने साल 2020 में पहली बार UPSC CSE की परीक्षा दी. उन्होंने प्रीलिम्स तो क्वालीफाई कर लिया, लेकिन मेन्स में सफलता नहीं मिली. इस असफलता के बाद उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और तैयारी को और मजबूत किया.

साल 2021 में उन्होंने दोबारा UPSC CSE परीक्षा दी और इस बार सफलता हासिल की. उन्होंने ऑल इंडिया 484वीं रैंक हासिल की और IAS के रूप में चयनित हुए.

विशाल की कहानी बताती है कि आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद सही मार्गदर्शन, परिवार का संघर्ष और लगातार मेहनत किसी भी बड़े लक्ष्य की राह खोल सकती है. उनके सफर में मां रीना देवी की मेहनत और शिक्षक गौरी शंकर का सहयोग अहम रहा.

यह भी पढ़ें:

3 बार प्रीलिम्स में फेल, चौथे बार में बनीं IAS अधिकारी, मुजफ्फरपुर की बिटिया ने रचा इतिहास

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By अनिकेत कुमार

अनिकेत कुमार प्रभात खबर के साथ पिछले दो वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार के आठ प्रमुख जिलों—मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, मधुबनी, शिवहर, बेतिया और मोतिहारी—की डिजिटल टीम को लीड करते हैं. पत्रकारिता में उन्हें करीब पांच वर्षों का अनुभव है.

डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न आयामों की समझ रखने वाले अनिकेत वर्तमान में हाइपरलोकल पत्रकारिता पर विशेष रूप से काम कर रहे हैं. हाइपरलोकल, क्राइम और राजनीति से जुड़ी खबरों में उनकी खास रुचि है. इससे पहले वे बिहार और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक खबरों पर भी काम कर चुके हैं. खबरों के साथ-साथ वीडियो इंटरव्यू, वीडियो रिपोर्ट और सोशल मीडिया रील्स बनाने का अनुभव भी रखते हैं. YouTube और Instagram के कंटेंट एल्गोरिद्म और डिजिटल ऑडियंस की पसंद को समझते हुए वे खबरों को अलग-अलग डिजिटल फॉर्मेट में प्रस्तुत करने पर भी काम करते हैं.

अपने पत्रकारिता करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को जमीनी स्तर पर कवर किया है. प्रभात खबर के साथ बिहार विधानसभा चुनाव कवरेज के दौरान उन्होंने करीब 50 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया, जहां मतदाताओं से सीधे संवाद किया और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में चौपाल कार्यक्रम किए. नेताओं से सीधे सवाल पूछने के साथ उन्होंने जनता के बीच जाकर कई जमीनी मुद्दों को वीडियो रिपोर्ट के जरिए सामने रखा. चुनाव के दौरान अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में समय बिताने और लोगों के बीच रहकर रिपोर्टिंग करने के अनुभव उन्हें डेस्क पर खबरों को बेहतर संदर्भ के साथ समझने और प्रस्तुत करने में मदद करते हैं.

प्रभात खबर से पहले वे राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने शुरुआती शिक्षा मुजफ्फरपुर में अंग्रेजी माध्यम से प्राप्त की और इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की.

बदलते मीडिया परिदृश्य और AI के दौर की पत्रकारिता को समझने में भी उनकी लगातार रुचि है. वे नए AI टूल्स और तकनीकों को सीखते हैं और उन्हें पत्रकारिता के काम में उपयोग करने के तरीकों पर लगातार प्रयोग करते रहते हैं. खाली समय में साहित्यिक किताबें पढ़ना और वीडियो बनाना उन्हें पसंद है. उनके लिए पत्रकारिता एक लगातार सीखने और बेहतर करने की प्रक्रिया है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >