''ऑनलाइन गेमिंग'' के बहाने मासूमों की ''साइबर ग्रूमिंग'' चरम पर, अभिभावक रहें सावधान!

'ऑनलाइन गेमिंग' के बहाने मासूमों की 'साइबर ग्रूमिंग' चरम पर, अभिभावक रहें सावधान!

संवाददाता, मुजफ्फरपुर जिस स्मार्टफोन को हम बच्चों की शिक्षा और मनोरंजन का साधन समझते हैं. वही आज मासूमों के लिए ””साइबर ग्रूमिंग”” का घातक हथियार बन गया है. ऑनलाइन गेमिंग की लत के सहारे साइबर अपराधी बच्चों के मासूम मन में सेंध लगा रहे हैं. उन्हें भावनात्मक रूप से फंसाकर ब्लैकमेलिंग और शोषण का शिकार बना रहे हैं. यह सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि हमारे समाज के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है, जिसे अनदेखा करना घातक सिद्ध हो सकता है.

मुजफ्फरपुर में बढ़ते मामले: जीवन-मरण का सवाल बनी ऑनलाइन लत

बीते दिनों जिले में 14 वर्षीय एक लड़के के साथ हुई घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है. ऑनलाइन मल्टीप्लेयर गेम ””फ्री फायर”” खेलते हुए एक अजनबी ने उस लड़के से दोस्ती की. शुरुआत में यह दोस्ती मासूमियत भरी लगी, लेकिन धीरे-धीरे उस व्यक्ति ने बच्चे का विश्वास जीता और फिर उसकी निजी तस्वीरों और जानकारियों को हासिल कर लिया. अपराधी ने बच्चे को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया, जिससे बच्चा अत्यधिक मानसिक तनाव में आ गया. गनीमत रही कि बच्चे के व्यवहार में आए अचानक बदलाव और गुमसुम रहने की आदत को देखकर उसके अभिभावकों को शक हुआ और उन्होंने मनोचिकित्सक से सलाह ली. 35 दिनों तक लगातार बच्चे की काउंसलिंग की गई, जिसके बाद बच्चे की जान बचाई जा सकी. यह घटना इस बात का प्रमाण है कि ऑनलाइन दुनिया में बच्चों की सुरक्षा कितनी संवेदनशील हो गई है.यही नहीं, कई बच्चे ऑनलाइन गेमिंग की लत में फंसकर माता-पिता के बैंक खातों में सेंध लगा चुके हैं, जिससे परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. एक दुखद घटना में आइपीएल में सट्टेबाजी के दौरान ढाई लाख रुपये हारने के बाद माड़ीपुर में एक युवक ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी थी. ये सभी घटनाएं दर्शाती हैं कि ऑनलाइन गतिविधियों का अनियंत्रित होना किस कदर जानलेवा साबित हो रहा है.””साइबर ग्रूमिंग”” – मासूमियत का डिजिटल शिकार””साइबर ग्रूमिंग”” एक ऐसी आपराधिक गतिविधि है, जिसमें अपराधी ऑनलाइन माध्यमों (जैसे ऑनलाइन गेम, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, चैटिंग ऐप्स) का उपयोग करके बच्चों और किशोरों से दोस्ती करते हैं, उनका विश्वास जीतते हैं और फिर उनका यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग या अन्य अपराधों के लिए इस्तेमाल करते हैं. यह प्रक्रिया अक्सर धीरे-धीरे होती है, जिसमें अपराधी भावनात्मक हेरफेर का उपयोग करते हैं, जिससे बच्चे अक्सर अपने माता-पिता या अन्य वयस्कों को इसके बारे में बताने से डरते हैं. वे बच्चों को उपहार का लालच देते हैं, अपनी पहचान छुपाते हैं और उन्हें अकेले में मिलने के लिए उकसाते हैं, जिससे वे आसानी से उनके जाल में फंस जाते हैं.

मनोचिकित्सक की चेतावनी: बच्चों में बढ़ रही सुसाइडल टेंडेंसी

मनोचिकित्सक डॉ. एके झा ने बताया कि ऑनलाइन गेमिंग की लत में फंसाकर बच्चों को भावनात्मक के साथ-साथ आर्थिक शोषण भी किया जा रहा है. इसका सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इससे बच्चों में ””सुसाइडल टेंडेंसी”” (आत्महत्या की प्रवृत्ति) बढ़ रही है. डॉ. झा के अनुसार, बीते छह सालों में उनके पास ऐसे 25 से अधिक मामले आ चुके हैं, जिनमें अधिकांश बच्चे किशोर अवस्था (टीन एजर्स) के हैं. यह आंकड़ा मुजफ्फरपुर में ऑनलाइन लत से उत्पन्न मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों की भयावहता को दर्शाता है.

B

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: CHANDAN

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >