Paperless Registry Strike: पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के खिलाफ मुजफ्फरपुर सहित पूरे बिहार में कातिबों (दस्तावेज नवीस) और स्टांप वेंडरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आगे भी जारी रहेगी. गुरुवार को पटना हाईकोर्ट से इस मामले पर फैसला आने की उम्मीद थी, लेकिन अदालत ने सुनवाई टालते हुए अगली तारीख 16 सितंबर तय कर दी है. इसके बाद कातिब संघ और स्टांप वेंडरों ने अपनी हड़ताल को अदालत के फैसले तक यथावत रखने का ऐलान किया है.
17 अगस्त से ठप है रजिस्ट्री कार्यालयों का कामकाज
कातिब और स्टांप वेंडर बीते 17 अगस्त से ही पेपरलेस निबंधन व्यवस्था का कड़ा विरोध करते हुए कार्य बहिष्कार पर हैं. आंदोलन के चलते पिछले करीब एक महीने से मुजफ्फरपुर जिला अवर निबंधन कार्यालय सहित पारू, मोतीपुर, कटरा और सकरा रजिस्ट्री कार्यालयों में सन्नाटा पसरा हुआ है. कातिबों के हड़ताल पर चले जाने से जमीन और मकान की खरीद-बिक्री का पूरा सिस्टम पूरी तरह लड़खड़ा गया है.
डिजिटल सिस्टम से फर्जीवाड़े और डेटा हेरफेर की आशंका
आंदोलनकारी कातिबों और वेंडरों का कहना है कि पूरी तरह कागजरहित और डिजिटल रजिस्ट्री व्यवस्था से जमीनों की हेराफेरी और फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ जाएगी. इसके अलावा तकनीकी दिक्कतों और सर्वर डाउन रहने के कारण आम रैयतों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा. वेंडरों का यह भी तर्क है कि इस व्यवस्था से उनके रोजगार पर सीधा संकट खड़ा हो गया है.
रोजाना 10 से भी कम रजिस्ट्री, सरकार को भारी राजस्व हानि
हड़ताल के कारण रजिस्ट्री दफ्तरों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है. जहां पहले प्रतिदिन सैकड़ों दस्तावेजों का निबंधन होता था, वहीं अब औसतन 10 से भी कम रजिस्ट्री हो पा रही हैं. कातिबों के न रहने से खरीदार और विक्रेता खुद ही जटिल प्रक्रिया पूरी करने को मजबूर हैं. सामान्य कामकाज ठप होने से आम जनता तो परेशान है ही, साथ ही सरकार को भी रोजाना करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
अब 16 सितंबर को हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
पटना हाईकोर्ट में गुरुवार को होने वाली सुनवाई टलने के बाद अब सभी की निगाहें 16 सितंबर की तारीख पर टिकी हैं. वेंडरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित विचार नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
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