सावधान! जमीन के काम में जाली कागजात देने पर होगी प्राथमिकी, लापरवाह CO भी नपेंगे, निर्देश जारी
Bihar Bhumi: बिहार में जमीन से जुड़े मामलों में जालसाजी पर सख्ती बढ़ा दी गई है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने फर्जी दस्तावेज देने वालों पर अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है. लापरवाही बरतने वाले अंचलाधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी.
Bihar Bhumi, देवेश कुमार: जमीन से जुड़े मामलों में जालसाजी करने वालों की अब खैर नहीं है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने दाखिल-खारिज, परिमार्जन और बंदोबस्ती जैसे राजस्व कामों में फेक डॉक्यूमेंट पेश करने वालों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है. विभाग ने राज्य के सभी अंचलाधिकारियों (CO) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं के तहत स्थानीय थाने में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज कराये.
अधिकारियों में हड़कंप
विभागीय सचिव गोपाल मीणा की तरफ से नये साल में पहली बार इस तरह का पत्र शनिवार को जारी किया गया है. निजी भूमि विवाद में भी कार्रवाई होगी. सरकारी भूमि के मामले में सीओ खुद प्राथमिकी दर्ज करायेंगे.
निजी या रैयती भूमि विवाद में जांच के बाद राजस्व पदाधिकारी के जांच के बाद पीड़ित पक्ष के आवेदन पर पुलिस केस दर्ज होगा. सचिव की तरफ से पत्र जारी होने के बाद डीएम सुब्रत कुमार सेन ने सभी सीओ, डीसीएलआर, एसडीओ और एडीएम को सख्ती के साथ इसका पालन करने को कहा है. इससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया है.
खुलासे के बाद भी सीओ ने दर्ज नहीं करायी प्राथमिकी
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव गोपाल मीणा ने सभी अंचलाधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि भूमि सुधार जन कल्याण संवाद 2025 के दौरान यह तथ्य सामने आया कि नामांतरण, सीमांकन और भू-अर्जन जैसे कामों में जाली डॉक्यूमेंट देकर प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं.
पिछली समीक्षा बैठकों में भी ऐसे मामले आये थे, लेकिन अंचलाधिकारियों के स्तर से प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई थी, जिसे विभाग ने गंभीरता से लिया है.
लापरवाही पर नपेंगे सीओ
विभाग ने साफ कर दिया है कि जाली दस्तावेज के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं किया जायेगा और यदि पहले ऐसा हो चुका है, तो उसकी समीक्षा कर कार्रवाई की जायेगी. सचिव ने चेतावनी दी है कि प्राथमिकी दर्ज नहीं कराना या मामले को दबाने का प्रयास कर्तव्य में घोर लापरवाही और कदाचार माना जायेगा. इसके लिए संबंधित अंचलाधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे.
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इन कारणों से लिया गया फैसला
भूमि सुधार जन कल्याण संवाद में यह तथ्य सामने आया कि बड़ी संख्या में लोग जाली कागजात के जरिए प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं. विभाग ने पाया कि पिछली बैठकों में निर्देश के बावजूद अंचल स्तर पर जालसाजों पर केस दर्ज नहीं किए जा रहे थे. विभाग ने निर्देश दिया है कि यदि पूर्व में किसी जाली दस्तावेज के आधार पर कोई आदेश (जैसे दाखिल-खारिज) पारित हो चुका है, तो उसकी कानूनी समीक्षा कर उसे रद्द किया जाए.
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कैसे दर्ज होगा मुकदमा
यदि मामला सरकारी जमीन से जुड़ा है, तो संबंधित अंचलाधिकारी सीधे स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज करायेंगे. दो पक्षों के बीच निजी जमीन के विवाद में, राजस्व अधिकारी की जांच रिपोर्ट और अनुशंसा के आधार पर पीड़ित पक्ष के आवेदन पर पुलिस केस होगा. जाली दस्तावेज के आधार पर कोई आदेश पारित न करें. नियम का पालन दृढ़तापूर्वक सुनिश्चित करने की सख्त हिदायत.
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