उर्वरकों का सैंपल भी लेने से कतराते हैं अधिकारी

उर्वरकों का सैंपल भी लेने से कतराते हैं अधिकारी एनपीके मिक्सचर का सूबे के दो जिले ने लिया सैंपलकई जिलों का दहाई पार नहीं, कई जिले शून्य पर आउट गुण नियंत्रण प्रयोगशाला की रिपोर्ट से खुलासा वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर किसान खेतों में फसल लगाने के दौरान घटिया उर्वरकों का उपयोग कर लेते हैं. लेकिन, कृषि […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

उर्वरकों का सैंपल भी लेने से कतराते हैं अधिकारी एनपीके मिक्सचर का सूबे के दो जिले ने लिया सैंपलकई जिलों का दहाई पार नहीं, कई जिले शून्य पर आउट गुण नियंत्रण प्रयोगशाला की रिपोर्ट से खुलासा वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर किसान खेतों में फसल लगाने के दौरान घटिया उर्वरकों का उपयोग कर लेते हैं. लेकिन, कृषि विभाग के अधिकारियों को सैंपल लेकर जांच कराने की फुरसत नहीं है. अधिकारी उर्वरकों का सैंपल बहुत कम लेते हैं. अगर पूरी संख्या में उर्वरक का सैंपल लिया जाता तो और अधिक मात्रा में उर्वरक अमानक पाया जाता. अधिकारियों के रवैये से कंपनियों के अधिकारियों और उर्वरक सिंडिकेट के काम का पता गहराई से चलता है. अधिकारी किसानों के हित नहीं बल्कि उर्वरक कंपनियों के हित में काम करते हैं. यह हाल केवल एक जिले में नहीं, बल्कि पूरे बिहार में है. कई ऐसे जिले हैं जिनके उर्वरक नमूना की जांच दहाई में भी नहीं हुआ है. एनपीके का सैंपल पूरे सूबे से मात्र छह लिया गया है. बाकी किसी जिलों ने सैंपल नहीं लिया है. पूर्वी चंपारण से एक व अररिया से पांच सैंपल लिया गया है. जहां तक एनपीके कंप्लेक्स, डीएपी, एमएपी के सैंपल कलेक्शन का सवाल है तो कैमूर से सात, अरवल से सात, सीवान से आठ, शिवहर से आठ, मधुबनी से छह, बांका से नौ, मुंगेर से छह, लखीसराय से शून्य और शेखपुरा से आठ सैंपल लिया गया है. यानी इन जिलों के अधिकारियों ने सैंपल लेने में दहाई अंक का आंकड़ा भी पार नहीं किया और बाकी जिले 10 से 20 में समेट दिया गया है. सूबे में यूरिया, अमोनियम सल्फेट के 355 सैंपल लिये गये थे. लेकिन, आंकड़ों में और जिलों की स्थिति काफी खराब है. रोहसात से चार, बक्सर से सात, औरंगाबाद से शून्य, जहानाबाद से दो, नवादा से पांच, सारण से तीन, सीवान से चार, वैशाली से तीन, पूर्वी चंपारण से शून्य, पश्चिमी चंपारण से दो, दरभंगा से सात, मधुबनी से पांच, समस्तीपुर से तीन, बेगूसराय से छह, सहरसा से एक, सुपौल से सात, खगड़िया से शून्य, अररिया से सात, किशनगंज से चार, बांका से छह, लखीसराय से एक सैंपल लिया गया. बाकी जिलों ने सैंपल लेने में दहाई पार कर लिया गया है.एमओपी में भागलपुर से 13, अररिया से 11, मधेपुरा से 15, समस्तीपुर से 10, वैशाली से 14, पश्चिमी चंपारण से 12, गया से 11 सैंपल लिये गये. बाकी जिलों में यह आंकड़ा शून्य में है तो बहुत जिलों में इकाई का आंकड़ा पार किया है. यानी, सैंपल कलेक्शन के मामले में जिलों की स्थिति ठीक नहीं है. एसएसपी, फॉस्फोजिप्सम और बेंटोनाइट का हाल तो और बुरा है. इसके सैंपल कलेक्शन में भारी कोताही की गयी है. सूबे में मात्र 84 सैंपल ही लिया गया है. यानी एक जिले ने तीन सैंपल भी नहीं लिया गया. भोजपुर, कैमूर, जहानाबाद, सीवान, नवादा, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सहरसा, सुपौल, खगड़िया, अररिया, कटिहार, लखीसराय, जमुई और शेखपुरा के अधिकारियों ने सैंपल ही नहीं लिया. जिंक और बोरॉन के मामले में भी अधिकारियों ने बहुत दिलचस्पी नहीं दिखाई है. 16 जिलों के अधिकारियों ने सैंपल ही नहीं लिये. सूबे में कुल 88 सैंपल लिये गये. यानी औसतन एक जिले ने तीन सैंपल भी नहीं लिया. मात्र पश्चिमी चंपारण ने 31 सैंपल लिये हैं. बाकी जिले में यह आंकड़ा दहाई में भी नहीं पहुंचा. अधिकारियों का यह काम किसानों के लिए काफी नुकसानदेह है.

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