इंजीनियर बेटे की हत्या के बाद आत्महत्या के प्रयास में घायल पिता ने भी दम तोड़ा

मुजफ्फरपुर : बेटे की हत्यारों की गिरफ्तारी न होने से दुखी पिता ने रविवार को चंद्रलोक गुमटी स्थित रेलवे ट्रैक पर पर आत्महत्या करना का प्रयास किया. इस दौरान ट्रेन की चपेट में आने से उनके दोनों पैर कट गये. सोमवार की सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी. इस मौत से पूरा कुनबा […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
मुजफ्फरपुर : बेटे की हत्यारों की गिरफ्तारी न होने से दुखी पिता ने रविवार को चंद्रलोक गुमटी स्थित रेलवे ट्रैक पर पर आत्महत्या करना का प्रयास किया. इस दौरान ट्रेन की चपेट में आने से उनके दोनों पैर कट गये. सोमवार की सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी. इस मौत से पूरा कुनबा खत्म होने के कगार पर आ गया है. परिवार में बचे लोग पूरी तरह से बेसुध हैं.
डर की वजह से वह अब शहर छोड़कर अपने गांव की तरफ रुख कर चुके हैं. रिश्तेदारों ने बताया कि वह बेटे की मौत से इस कदर बदहवास हो चुके थे कि शहर में उसे ढूढ़ने के लिए निकल पड़ते थे. उधर शंशाक के हत्यारों की गिरफ्तारी न होने से उसका पूरा परिवार भय वह दहशत में है. इस वजह से वे शहर छोड़ गांव की ओर पलायन कर गये हैं.
प्रतिमा ने बेटे के बाद पति को खोया. बिपीन ठाकुर की पत्नी प्रतिमा ने पहले जवान बेटा खोया. अभी वह इस हत्या से पूरी तरह उबर भी नहीं पायी थी कि उन्हें एक गहरा जख्म फिर मिल गया.
पति का दोनों पैर कटा तो यह आस थी कि कम से कम जिंदा हैं, लेकिन सोमवार को उनकी मौत ने उन्हें तोड़कर रख दिया. अब उन्होंने बेटे के साथ अपने पति को भी खो दिया. बेटे व पति की मौत से वह इस कदर दुखी हो गयी हैं कि वह बार-बार बेहोश हो जा रही हैं. उनकी हालात भी खराब हो चुकी है. बेटी का भी रो-रो कर बुरा हाल है, जो भी इस घटना को सुन रहा है, वह एकबारगी विश्वास नहीं कर पा रहा है. हर कोई यही कह रहा है कि ऐसा अन्याय भगवान किसी दुश्मन के साथ भी न करें.
शहर छोड़कर गांव में ली पनाह
बेटे व पोते की मौत से दुखी सीताराम ठाकुर अब यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि वह कहां रहें. बेटे की मौत के बाद वह लगातार अपने गांव हथौड़ी थाना के धनुकी गांव रह रहे थे.
दो दिन पहले शुक्रवार को किसी तरह हिम्मत जुटाते हुए शहर तिरहुत कॉलोनी में आये थे. दबी जुबान से चर्चा यह थी कि जिस दिन वह गांव से आये, उसी दिन रात में हत्यारोपियों द्वारा धमकी दी गयी थी. डर की वजह से वह शहर में रहने वाले एक रिश्तेदार के यहां पूरे परिवार के साथ आ गये थे. इसी बीच बिपीन ठाकुर ने आत्महत्या का प्रयास किया और इलाज के दौरान उनकी मौत भी हो गयी.
बेटे की मौत के बाद उन्होंने अपने गांव का रुख कर लिया है. रिश्तेदारों की मानें तो वह अब गांव छोड़कर शहर में नहीं रहना चाहते. उन्हें आशंका है कि दो-दो बेटे को खोने के बाद अपराधियों ने कुछ बुरा कर दिया तो बेटी व पतोहू को भी खो देंगे.
ये है पूरी घटना
21 जुलाई की रात अहियापुर थाना क्षेत्र के तिरहुत कॉलोनी में इंजीनियरिंग छात्र शशांक शेखर की गला रेत कर हत्या कर दी गयी थी. इकलौते बेटे की हत्या के बाद से पूरा परिवार टूट सा गया है.
पिता बिपीन ठाकुर कई दिनों से बीमार चल रहे थे. रविवार को वह पूरे परिवार के साथ भयवश अपने रिश्तेदार वीरेंद्र ठाकुर के यहां आये थे. शाम को वह चंद्रलोक गुमटी स्थित रेलवे ट्रैक के किनारे गये थे. आत्महत्या के प्रयास में वह ट्रेन की चपेट में आ गये.
इसकी वजह से उनका दोनों पैर कट गया. आसपास के लोग उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले गये जहां इलाज के दौरान सोमवार की सुबह उनकी मौत हो गयी. चर्चा है कि अभियुक्तों के भय से ये लोग अपना घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां शरण लिये हुए हैं. डर है कि कही पूरे परिवार के उपर कोई संकट फिर से न आ जाये. फिलहाल परिजन इस कदर भयभीत है कि कुछ भी बोलने से इनकार कर रहे हैं.
पहले पोता खोया अब बेटा
सीताराम ठाकुर को जिस उम्र में सहारा चाहिए था, उस उम्र में वह जवान पोते को खो चुके हैं. अभी पोते की मौत ही आग ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि इकलौते बेटे बिपीन ठाकुर को भी हमेशा के लिए खो दिया. बेटे की मौत को वह बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं.
बीमारी की हालत में बेटे के मौत के गम ने उन्हें अंदर-ही-अंदर तोड़कर रख दिया है. सीताराम ठाकुर अब अकेले पड़ चुके हैं. उनकी हालात ऐसी हो चुकी है कि अब वह कुछ बोलने की हिम्मत तक नहीं कर पा रहे हैं. इनकी चुप्पी से शशांक हत्याकांड के खुलासे में पुलिस भी अपने आपको असहाय महसूस कर रही है.
बेटे की मौत से टूट गये थे विपिन ठाकुर
विपिन ठाकुर अपने इकलौते बेटे शंशाक शेखर की हत्या से पूरी तरह टूट गये थे. उसकी हत्या से वह इस कदर दुखी हो गये थे कि बीमार होने के बावजूद वह किसी तरह पैदल जाकर श्मशान पर उसकी चिता की राख को देखते थे. बेटे की मौत ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ दिया था.
आसपास के लोगों ने बताया कि वह कभी-कभी शहर में घूम-घूम कर बेटे शंशाक को ढ़ढ़ने निकल पड़ते थे. इस बीच हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी देखने डरे-सहमे कभी-कभार बाहर से ही थाने का चक्कर लगा लिया करते थे.
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