मिल गयी मीनाक्षी होटल की फाइल

मुजफ्फरपुर: खास महाल की जमीन पर अवैध तरीके से स्टेशन रोड में बनायी गयी बहुमंजिले मीनाक्षी होटल की जांच फाइल आखिरकार मिल गयी. मंगलवार को यह फाइल राजस्व कार्यालय में ही मिली है . राजस्व व भूमि सुधार विभाग पटना से सितंबर 2014 में मीनाक्षी होटल के निर्माण की रिपोर्ट तलब किया गया था. इसके […]

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मुजफ्फरपुर: खास महाल की जमीन पर अवैध तरीके से स्टेशन रोड में बनायी गयी बहुमंजिले मीनाक्षी होटल की जांच फाइल आखिरकार मिल गयी. मंगलवार को यह फाइल राजस्व कार्यालय में ही मिली है . राजस्व व भूमि सुधार विभाग पटना से सितंबर 2014 में मीनाक्षी होटल के निर्माण की रिपोर्ट तलब किया गया था.

इसके बाद से ही गुम फाइल की खोज हो रही थी. उस समय मामला सामने आया था कि तत्कालीन अपर समाहर्ता धनजंय ठाकुर ने डीसीएलआर ऑफिस फाइल को मंगाया था, लेकिन राजस्व विभाग में फाइल का अता पता नहीं मिल रहा था.

दिलचस्प बात यह है कि फाइल तब मिली है जब रिपोर्ट सरकार के पास भेजी जा चुकी है. भूमि सुधार विभाग के रिमाइंडर के बाद इस फाइल की जम कर खोज हुई थी. इसके लिए डीसीएलआर कार्यालय में पूर्व में पदस्थापित एक कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति भी किया गया था. उस समय फाइल नहीं मिली थी. इस कारण सरकार के पास रिपोर्ट भेजने में काफी विलंब भी हुआ.
सीएजी की रिपोर्ट में आपत्ति
डीडीसी ने जिला परिषद के कार्यपालक अभियंता व जिप के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसे सरकार के पास भेजा गया था. दरअसल जुलाई 2012 में सीएजी की टीम ने डीसीएलआर पूर्वी कार्यालय का निरीक्षण किया था. सीएजी की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि खास महाल की जमीन पर ही होटल का निर्माण हुआ है. अवैध निर्माण रोकने में विभाग विफल रहा. इस कारण सही तरीके से लीज नहीं हो पाया. इससे सरकार के दो करोड़ से अधिक राशि की वसूली नहीं हो पायी. वर्ष 2011- 12 में जमीन के बाजार मूल्य की गणना चार लाख 54 हजार 300 रुपये प्रति डिसमिल से किया था.
नहीं ली गयी थी डीएम से अनुमति
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 21435 हेक्टेयर खास महाल की जमीन का टुकड़ा रिवीजनल सव्रे खतियान में जिला परिषद के कर्मचारियों के विश्रम गृह के रूप में दर्ज है. खास महाल की जमीन के व्यावसायिक उपयोग के लिए आयुक्त व डीएम से अनुमति नहीं ली गयी थी. सितंबर 2012 में भूमि सुधार उपसमाहर्ता पूर्वी ने दावा किया था कि होटल निर्माण की अनुमति नहीं दी गयी थी. इस मामले में जिला परिषद के साथ होटल मालिक को नोटिस दिया गया था.
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