स्वास्थ्य विभाग ने 16 लाख ओआरएस जिंक बांटे

कुमार दीपू, मुजफ्फरपुर : चमकी बुखार से जब 60 बच्चों ने एसकेएमसीएच व केजरीवाल अस्पताल में दम तोड़ दिया, तो आनन फानन में स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 12 लाख पंपलेट, 16 लाख ओआरएस व जिंक के पैकेट बांटे. इतना ही नहीं हर पीएचसी, सीएचसी व एपीएचसी में ओआरएस जिंक कॉर्नर खोल दिये गये, जहां […]

कुमार दीपू, मुजफ्फरपुर : चमकी बुखार से जब 60 बच्चों ने एसकेएमसीएच व केजरीवाल अस्पताल में दम तोड़ दिया, तो आनन फानन में स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 12 लाख पंपलेट, 16 लाख ओआरएस व जिंक के पैकेट बांटे. इतना ही नहीं हर पीएचसी, सीएचसी व एपीएचसी में ओआरएस जिंक कॉर्नर खोल दिये गये, जहां वितरण शुरू कर दिया गया. हर प्रखंड की स्लम बस्ती व अस्पताल में ओआरएस जिंक व पंपलेट बांटे जा रहे है या नहीं, इसकी भी मॉनिटरिंग स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने करना शुरू कर दिया.

सिविल सर्जन शैलेश प्रसाद सिंह, डीपीएम बीपी वर्मा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी आरपी सिंह समेत सभी पीएचसी प्रभारी प्रखंडों में दौड़ा करना शुरू कर दिया. इसके अलावा स्लम बस्ती, इंट भट्टा, पंचायत में भी कॉर्नर लगा ओआरएस, जिंक पैकेट के साथ साथ आशा व एएनएम के साथ एक डॉक्टर लोगों को चमकी बुखार से बचाव की जानकारी दे रहे हैं.
कुढ़नी में दो हजार ओआरएस के पैकेट बांटे: मुजफ्फरपुर. ह्यूमन राइटस प्रोटेक्शन कमेटी की ओर से कुढ़नी के किशुनपुर मोहिनी गांव में अभियान चला एइएस से बचाव की जानकारी देकर ओआरएस के पैकेटों का वितरण किया गया. साथ ही संस्था की ओर से गये डॉक्टरों ने बेलाडोना-वन थाउजेंड सीएच की खुराक बच्चों को खिलायी. यह जानकारी संस्था के चेयरमैन डॉ शिवेश सत्यम ने दी. मौके पर प्रतिक कुमार, सोनू सिंह, डॉ आशुतोष, डॉ ऋचाा, सुधीर चौबे, मो शादाब खान, डॉ सृष्टि मिश्रा आदि मौजूद थीं.
लगभग पांच लाख बच्चों को बचाव के लिये नहीं चलाया गया अभियान
जिले के लगभग पांच लाख बच्चों को चमकी बुखार से बचाव के लिए कोई भी अभियान नहीं चलाया गया. 11 जून तक जब बच्चों की मौत का आंकड़ा 40 पहुंच गया, तो स्वास्थ्य विभाग ने आनन फानन में 12 लाख पंपलेट व 16 लाख ओआरएस जिंक के पैकेट क्षेत्रों में बांटना शुरू किया.
स्थिति यह कि बच्चों पर पिछले कई साल से कहर बरपा रही चमकी बुखार से बचाव के तरीकों व उन्हें जागरूक करने के लिए आज तक जिले के स्कूलों में जागरूकता अभियान संबंधित कोई पहल नहीं की गयी. चमकी बुखार से हर साल जिले में कई बच्चों की जानें जाती हैं. अधिकांश बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों के ही होते हैं. स्वास्थ्य या शिक्षा विभाग ने स्कूलों को जागरूकता अभियान से नहीं जोड़ा. यह अधिकारियों की संवेदनहीनता व लापरवाही है.

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