80% स्कूलों में गणित-विज्ञान पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं

मुजफ्फरपुर : जिले के लगभग 80 प्रतिशत प्लस टू स्कूलों में गणित व विज्ञान पढ़ाने वाले शिक्षक भी नहीं है. ऐसे में वर्ष 2018 की बोर्ड परीक्षा में आधी-अधूरी तैयारियों के भरोसे ही हजारों परीक्षार्थी शामिल होंगे. 80 सरकारी स्कूलों में इंटर स्तर की पढ़ाई होती है, जिसमें केमिस्ट्री के 61, फिजिक्स के 65 व […]

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मुजफ्फरपुर : जिले के लगभग 80 प्रतिशत प्लस टू स्कूलों में गणित व विज्ञान पढ़ाने वाले शिक्षक भी नहीं है. ऐसे में वर्ष 2018 की बोर्ड परीक्षा में आधी-अधूरी तैयारियों के भरोसे ही हजारों परीक्षार्थी शामिल होंगे. 80 सरकारी स्कूलों में इंटर स्तर की पढ़ाई होती है, जिसमें केमिस्ट्री के 61, फिजिक्स के 65 व गणित के 60 शिक्षक नहीं है. यहां दूसरे विषय के शिक्षकों के भरोसे इंटरमीडिएट के छात्र- छात्राओं का कोर्स पूरा कराया जाता है. इस साल बोर्ड परीक्षा में रिजल्ट खराब होने के बाद शिक्षकों की कमी का मामला उठा तो सरकार ने जल्द ही बहाली का दावा किया, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी कोई उम्मीद नहीं दिख रही.

विभाग ने साल की शुरुआत में नियोजन के लिए विषयवार रिक्ति तैयार की थी. इसके अनुसार जिले में 454 शिक्षकों की कमी बतायी गयी. इसमें जंतु विज्ञान में 12, वनस्पति शास्त्र में 3, अर्थशास्त्र में 6, भूगोल में 24, इतिहास में 10, गृह विज्ञान में 16, दर्शनशास्त्र में 2, राजनीति शास्त्र में 15, मनोविज्ञान में 14, कंप्यूटर साइंस में 20, समाज शास्त्र में 42, अकाउंट में 8, इंटरप्रेन्योरशिप में 29, हिंदी में 25, मैथिली में 2, संस्कृत में 1, उर्दू में 4 व संगीत में 35 शिक्षकों की रिक्ति तय की गयी है.
माध्यमिक स्कूलों की रिक्ति का जुटा रहे रिकॉर्ड
माध्यमिक स्कूलों में पदस्थापन व रिक्ति का आंकड़ा विभाग अभी जुटा रहा है. राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान कार्यालय से पिछले महीने ही शिक्षकों की विषयवार तैनाती व निर्धारित पद का रिकाॅर्ड मांगा गया है. अभी तक करीब 50 प्रतिशत स्कूलों ने ही डाटा दिया है. विभागीय लोगों ने बताया कि इस महीने के अंत तक सभी स्कूलों का रिकॉर्ड मिल जाने के बाद इसे राज्य कार्यालय को भेजा जायेगा.
आरक्षण के कारण नहीं मिल रहे शिक्षक
शिक्षा व्यवस्था के लिए अब खतरे की घंटी भी बज चुकी है. स्थिति यह है कि सरकार नियोजन की प्रक्रिया तो शुरू कर रही है, लेकिन योग्य अभ्यर्थी प्रमुख विषयों में नहीं मिल रहे हैं. पिछले साल हुए नियोजन में केमिस्ट्री के लिए कोई आवेदन नहीं आया था. वहीं अन्य विषयों में रिक्ति से भी कम आवेदन मिले थे. जो मानक को पूरा कर सके, उनकी बहाली हुई. इसके बाद भी सीट खाली रह गयी.
जानकारों का कहना है कि नियोजन में आरक्षण के कारण दिक्कत हो रही है. आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी मानक पूरा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे रिक्तियां बनी हुई हैं.
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