दुरुस्त सड़कों को बनाने की होड़, जर्जर सड़कों का नहीं हो रहा निर्माण

मुंगेर नगर निगम की मानों सुर्खियों में बनी रहने की आदत सी बन गयी है. जिसका शिकार शहर की भोली-भांती जनता हो रही है.

बदहाली. निगम का योजना विभाग व अभियंता की मिलीभगत से शहर के सड़क निर्माण में भेदभाव

प्रतिनिधि, मुंगेर. मुंगेर नगर निगम की मानों सुर्खियों में बनी रहने की आदत सी बन गयी है. जिसका शिकार शहर की भोली-भांती जनता हो रही है. कभी कूड़ा घोटाला तो कभी स्टीमेट घोटाला के लिए सुर्खियां बटोरने वाली निगम इस बार सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर हो रही भेद-भाव के कारण सुर्खियों में है. क्योंकि जर्जर सड़कों को नजर अंदाज कर निगम प्रशासन दुरुस्त सड़कों को बनाने में लगी है. जिससे शहर के कई वार्ड के नागरिकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

डेढ़ दशक से नहीं बना है बिंदवारा शर्मा टोला मार्ग

शहर के दक्षिणी क्षेत्र स्थित बिंदवारा शर्मा टोला मार्ग काफी महत्वपूर्ण मार्ग है. इस होकर हजारों की संख्या में उस क्षेत्र के लोग हवाई अड्डा, सफियासराय एनएच-80 पर आते-जाते हैं, लेकिन यह सड़क पिछले डेढ़ दशक से नहीं बना है. इतना ही नहीं बिंदवारा सरस्वती मैदान मार्ग, पुरानीगंज मनसरी तल्ले से एचपी गैस गोदाम तक की सड़कों की हालात काफी खराब है. संदलपुर चौराहा से पुरानीगंज मुख्य मार्ग, मनिया चौराहा फौजदारी बाजार होते हुए कासिम बाजार रोड तक की स्थिति दयनीय है. सिर्फ यही सड़क नहीं, बल्कि दक्षिणी क्षेत्र के अधिकांश सड़कों की स्थिति अमुमन यही है, लेकिन इसे बनाने में निगम प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है. इस क्षेत्र के लाग सड़क के मामले में अभिशप्त हैं.

निगम प्रशासन सड़क बनाने में बरत रही है भेदभाव

निगम प्रशासन सड़क बनाने में बड़े पैमाने पर भेद-भाव बरत रही है. जर्जर सड़कों को छोड़ कर निगम प्रशासन में दुरुस्त सड़कों को बनाने की होड़ लगी है. हाल के वर्षों में ही सितारिया पेट्रोल पंप से राजा बाजार मार्ग बनी थी. जबकि भगत सिंह चौक से भूसा गली होते हुए बड़ी बाजार सड़क को जोड़ने वाली मार्ग भी बनी. बाजार क्षेत्र की दर्जनों ऐसी सड़कें हैं. जो दुरूस्त रहने के बाद भी बनाने की प्रकिया में है, लेकिन जो सड़केंं जर्जर व चलने लायक नहीं है, उसे नहीं बनाया जा रहा है.

योजना विभाग व अभियंता के मिलीभगत से चल रहा खेल

नगर निगम के अधीन कुल 45 वार्ड है. जिसमें सैकड़ों मार्ग हैं. जिसका निर्माण और रखरखाव निगम प्रशासन के अधीन है. निगम प्रशासन का योजना विभाग और अभियंताओं का दल यह तय करता है कि कहां की सड़क अधिक जर्जर है, जिसे बनाने की जरूरत है और कहां की दुरुस्त सड़क हैं. जिसे वर्तमान समय में बनाने की जरूरत नहीं है, लेकिन यहां योजना विभाग और अभियंताओं की मिलीभगत से जर्जर सड़क को छोड़ कर दुरुस्त सड़कों को बनायी जा रही है, जबकि जिम्मेदार पूरी तरह से मौन धारण किये हुए है.

नियमों को ताक पर रख कर हो रहा पीसीसी सड़क का निर्माण

नियमानुसार जिन सड़कों का पीसीसी निर्माण होना है अगर वहां पूर्व से सड़क बनी है तो उसे पूरी तरह से उखाड़ना है. उसके बाद ही वहां दूसरी बार पीसीसी सड़क के लिए ढलाई होना है, लेकिन यहां पूर्व की बनी सड़कों पर ही ढलाई कर सड़क का निर्माण कर दिया जा रहा है. इससे साल-दो साल में सड़क उखड़ने लगती है. इतना ही नहीं सड़क ऊपर हो जा रही है और घर की दहलीज नीचे होती जा रही है. इस कारण बारिश के दिनों में सड़क का पानी घरों में घुसने लगता है. हालांकि, जिस वार्ड की जनता जागरूक है वह ऐसा नहीं होने दे रहे है. शहर के घोषीटोला में कृष्ण प्रिया सदन गली में पीसीसी सड़क की ढलाई होनी थी, लेकिन उस गली के जागरूक जनता ने निर्माण कार्य को यह कहते हुए रोक दिया कि पहले पूर्व में बनी सड़क को पूरी तरह उखाड़ कर हटाये, तभी ढलाई करें. संवेदक को ऐसा करना पड़ा.

कहते हैं नगर आयुक्त

जर्जर सड़कों को प्राथमिकता देते हुए निर्माण कराया जाना चाहिए. निगम के अधीन वाली सड़कों को चरणबद्ध तरीके से निर्माण कराया जायेगा.

कुमार अभिषेक, नगर आयुक्त

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Published by: Birendra kumar sing

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