सबके साथ एक समान न्याय करते हैं शनिदेव, सुबह से ही लगा रहा तांता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शनिवार का दिन कर्मफल दाता और न्याय के देवता भगवान शनिदेव की विशेष आराधना के लिए ही समर्पित माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि शनिदेव जातकों को उनके कर्मों के आधार पर पूरी तरह निष्पक्ष और एक समान न्याय प्रदान करते हैं.
इसी आस्था के साथ मुंगेर के हृदय स्थली बेकापुर मयूर चौक स्थित शनि मंदिर में सुबह से ही पुरुषों और महिला श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई. भक्तों ने मंदिर परिसर में प्रवेश कर कतारों में लगकर भगवान को नीले पुष्प, अक्षत, धूप और नैवेद्य अर्पित किया.
शनिवार को होती है विशेष महापूजा; सरसों तेल और तिल चढ़ाने की रही परंपरा
यूं तो इस प्रसिद्ध मंदिर में प्रतिदिन ही आम श्रद्धालु अपनी नियमित पूजा के लिए पहुंचते हैं, लेकिन शनिवार के दिन मंदिर प्रबंधन और मुख्य पुजारी के सानिध्य में एक विशेष अनुष्ठान और महापूजा का आयोजन किया जाता है.
- तेल और काले तिल का अर्पण: शनिवार की महिमा को देखते हुए हजारों भक्तों ने भगवान शनिदेव की प्रतिमा पर सरसों का तेल अर्पित किया और साथ ही काला तिल, लोहा, और काली उड़द की दाल चढ़ाकर शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या के कुप्रभावों से मुक्ति की कामना की.
- दीपदान से चमका परिसर: मंदिर के चारों ओर श्रद्धालुओं द्वारा सरसों तेल के दीपक जलाए जाने से पूरा परिसर दीपों की रोशनी से जगमगा उठा.
शाम 7 बजे हुई भव्य आरती, शंखनाद और घंटियों से गूंजा बेकापुर क्षेत्र
शनिवार को इस मंदिर का मुख्य आकर्षण संध्या कालीन महाआरती होती है. ठीक शाम 7:00 बजे जब मुख्य पुजारी द्वारा भगवान शनिदेव की कपूर और भव्य दीपों से महाआरती शुरू की गई, तो पूरा बेकापुर क्षेत्र भक्ति के सागर में डूब गया.
आरती के दौरान सैकड़ों भक्तों की मौजूदगी में लगातार बज रही बड़ी-बड़ी घंटियों, शंखनाद और शनि चालीसा के पाठ की ध्वनि से पूरा वातावरण आध्यात्मिक और गूंजमान बना रहा. मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से उमड़ने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर सुरक्षा, कतार प्रबंधन और शुद्ध पेयजल के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन करने में कोई विशेष कठिनाई नहीं हुई.
