कुपोषण दर 3.55 प्रतिशत, बावजूद एक साल में एनआरसी पहुंचे मात्र 134 बच्चे

जिला प्रशासन के आइसीडीएस विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण जिले में कुपोषित बच्चों के मामले न केवल बढ़ रहे हैं, बल्कि ऐसे कुपोषित बच्चों को समुचित देखभाल व इलाज भी नहीं मिल पा रहा है.

जिले में बदहाल कुपोषण कार्यक्रम

जिले में कुपोषित बच्चों के लिये संचालित पोषण पुर्नवास केंद्र का नहीं मिल रहा समुचित लाभ

मुंगेर

जिले के कुपोषित बच्चों की बेहतर देखभाल व इलाज के लिए सदर अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित किया जाता है. जहां स्वास्थ्य विभाग और आइसीडीएस के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों द्वारा जिले के कुपोषित बच्चों को यहां इलाज के लिए भेजा जाता है, लेकिन जिला प्रशासन के आइसीडीएस विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच आपसी तालमेल की कमी के कारण जिले में कुपोषित बच्चों के मामले न केवल बढ़ रहे हैं, बल्कि ऐसे कुपोषित बच्चों को समुचित देखभाल व इलाज भी नहीं मिल पा रहा है. इसका अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 के अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच सदर अस्पताल के एनआरसी वार्ड में कुल 134 कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए लाया गया है. यह हाल तब है, जब जिले में कुपोषण का दर 3.55 प्रतिशत है.

कुपोषित बच्चों के लिये एनआरसी वार्ड में 14 बेड की सुविधा

कुपोषित बच्चों के इलाज और उन्हें कुपोषण से बचाने के लिए सदर अस्पताल में 14 बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) वार्ड संचालित हो रहा है़ यहां बच्चों को कुपोषण से बचाया जाता है. आइसीडीएस के तहत संचालित आंगनबाड़ी केंद्र व जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम दोनों द्वारा ही कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर पोषण पुनर्वास केंद्र में भेजना है. यहां कुपोषित बच्चों को 15 दिनों तक रखा जाता है. जहां उनके खाने-पीने का अलग से डायट निर्धारित होता है. इस वार्ड में कुपोषित बच्चों के साथ न केवल उनकी माताओं के रहने की भी सुविधा है, बल्कि कुपोषित बच्चों के इलाज अवधि तक इन बच्चों की माताओं को अलग से राशि का भुगतान भी किया जाता है.

आंगनबाड़ी केंद्र व स्वास्थ्य विभाग भी नहीं ले रहे दिलचस्पी

जिले के नौ प्रखंडों में से अधिकांश प्रखंडों में न तो स्वास्थ्य विभाग और न ही आईसीडीएस विभाग कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र तक भेजने में दिलचस्पी ले रहे हैं. हाल यह है कि अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच जहां केवल 134 कुपोषित बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्र में इलाज के लिये पहुंचे हैं. इतना ही नहीं जिले के 9 प्रखंडों में कार्यरत राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 9 टीमों द्वारा इस दौरान केवल 18 कुपोषित बच्चों को ही पोषण पुनर्वास केंद्र में इलाज के लिये भेजा गया है.

एनआरसी में नियमित चिकित्सक तक नहीं है उपलब्ध

सदर अस्पताल में भले ही कुपोषित बच्चों के लिये पोषण पुनर्वास केंद्र सालों से संचालित हो रहा है, लेकिन साल 2025 में मॉडल अस्पताल बनने के बाद से अबतक इसे शिफ्ट नहीं किया गया है, जबकि अन्य वार्डों को मॉडल अस्पताल में शिफ्ट कर देने से पोषण पुनर्वास केंद्र अब पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है. हद तो यह है कि सालों से यहां नियमित रूप से चिकित्सक नहीं है. दिसंबर 2025 में यहां विभाग से डॉ प्रेम प्रकाश को नियुक्त किया गया था, लेकिन वह भी आगे की पढ़ायी के लिये जा चुके हैं. ऐसे में पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कुपोषित बच्चों के लिये नियमित रूप से चिकित्सक नहीं है. हाल यह है कि यदि रात या दिन में किसी समय यहां भर्ती बच्चे की तबीयत बिगड़ जाये तो उसे या तो इमरजेंसी वार्ड या पीकू वार्ड ले जाना पड़ता है.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ राजू ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र तक कुपोषित बच्चों को लाने की जिम्मेदारी आइसीडीएस और स्वास्थ्य विभाग दोनों पर है. एनआरसी वार्ड को जल्द ही मॉडल अस्पताल में शिफ्ट किया जायेगा. इसके लिये वार्ड को तैयार करने का निर्देश दिया गया है.

प्रखंडवार एनआरसी में भेजे गये कुपोषित बच्चों की संख्या

प्रखंड पूरे साल का लक्ष्य एनआरसी आये बच्चे प्रतिशत

असरगंज 48 2 4.17

बरियारपुर 48 10 20.83

धरहरा 48 16 33.33

खड़गपुर 48 14 29.17

जमालपुर 48 29 60.48

सदर प्रखंड 48 56 116.7

संग्रामपुर 48 5 10.42

तारापुर 48 2 4.16

टेटियाबंबर 48 0 0

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Author: AMIT JHA

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