गेहूं, सरसों व मक्का फसल में छिड़काव को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र मुंगेर ने जारी की एडवायजरी

गेहूं, सरसों व मक्का फसल में छिड़काव को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र मुंगेर ने जारी की एडवायजरी

मुंगेर. न्यूनतम तापमान में गिरावट के कारण फसलों पर पड़ से प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र मुंगेर ने किसानों के लिए एडवायजरी जारी की है. ताकि किसान अपने फसलों को बचा कर उनकी उत्पादक क्षमता को बढ़ा सकें. एक ओर जहां टमाटर, मटर एवं आलू सहित सब्जी वाली फसलों में आवश्यकतानुसार निकाई-गुड़ाई एवं सिंचाई करने की सलाह किसानों को दी गयी है. वहीं गेहूं, सरसों एवं मक्का जैसी फसलों में छिड़काव के बारे में जानकारी दी गयी.

गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए उचित उर्वरक प्रबंधन की जरूरत

गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए उचित उर्वरक प्रबंधन (जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश), समय पर सिंचाई (खासकर पहली सिंचाई कल्ले निकलने की अवस्था में), और खरपतवार नियंत्रण बेहद जरूरी है. कृषि विज्ञान केंद्र मुंगेर के प्रधान मुकेश कुमार ने बताया कि गेहूं की फसल यदि 40-45 दिन की हो गयी है तो दूसरी सिंचाई के साथ 30 किलोग्राम नत्रजन प्रति हेक्टेयर की दर से उपरिवेशन करें. विलंब से बोई गई गेहूं की फसल जो 21 से -25 दिनों की अवस्था में हो उसमें सिंचांई के बाद 30 किलोग्राम नत्रजन प्रति हेक्टेयर की दर से उपरिवेश करें. गेहूं की बुआई के 30-35 दिनों बाद ( पहली सिंचाई के प्रश्चात ) फसल में विभिन्न प्रकार के खरपतवार उग आते हैं, जो तेजी से बढ़कर गेहूं की वृद्धि एवं उपज को प्रभावित करते हैं. इसके नियंत्रण के लिए सल्फोसल्यूरॉन 33 ग्राम एवं मेटसल्फ्यूरॉन 20 ग्राम प्रति हेक्टेयर को 500 लीटर पानी में घोलकर खड़ी फसल पर छिड़काव करें.

सरसों व मक्का फसल को कीट से बचाव के लिए छिड़काव की सलाह

किसानों को सरसों एवं मक्का फसल को कीट से बचाव को लेकर छिड़काव करने की सलाह दी गयी है. किसानों से कहा गया है कि सरसों की फसल जो पुष्प अवस्था पार कर चुकी हो उसमें लाही की निगरानी करें. क्योंकि इसके प्रकोप से उपज में भारी कमी आ सकती है. कीट दिखने पर 50 से 100 पीले चिपचिपे फंदे ( फेरोमोन ट्रेप ) प्रति एकड़ लगाये तथा अधिक नुकसान की स्थिति में इमिडाक्लोपिड 17.8 एसएल की 1 मिलीलीटर मात्रा को 3 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. जबकि मक्का फसल के तना बेधक कीट की नियमित निगरानी करने की सलाह किसानों को दी गयी. बताया को बताया कि अंकुरण के दो सप्ताह बाद फोरेट 10 जी या काबॉफ्यूरान 3 जी के 7-8 दाने प्रति गाभा दें. अधिक प्रकोप की स्थिति में डेल्टामेथ्रिन 250-300 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें. नवंबर के प्रारंभ में बोयी गयी मक्का की फसल जो 50-60 दिनों की अवस्था में हो, उसमें 50 किलोग्राम नत्रजन उर्वरक का प्रयोग कर मिट्टी चढ़ाएं.

मटर को फफूंदी रोग से बचाने के लिए करें केराथेन दवा का छिड़काव

कृषि वैज्ञानिक मुकेश कुमार ने बताया कि न्यूनतम तापमान में गिरावट की संभावना है. जो संवेदनशील फसल जैसे टमाटर, मटर, आलू पर कम नमी के कारण प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. आगत बोयी गयी मटर की फसल में चूर्णित फफूंदी रोग की किसान निगरानी करें. इस रोग में पत्तियों, फलों एवं तनों पर सफेद चूर्ण दिखायी देता है. इसके नियंत्रण के लिए केराथेन दवा 1.0 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी अथवा सल्फेक्स दवा 3 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें. टमाटर, आलू फसलों के खेतों में पर्याप्त नमी बनाये रखने की सलाह दी गयी और सब्जी वाली फसलों में आवश्यकतानुसार निकाई-गुड़ाई एवं सिंचाई करने की सलाह किसानों को दी गयी.

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Published by: Birendra kumar sing

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