धरती पर जब अधर्म बढता है तो ईश्वर स्वयं सृष्टि का संचालन करते हैं : आचार्य शिवम
वृंदावन से पधारे आचार्य शिवम मिश्रा ने शिवपुराण की दिव्य कथाओं में कार्तिकेय का जन्म, तारकासुर का वध व भगवान भोलेनाथ द्वारा त्रिपुरासुर के वध की कथा सुनाई
असरगंज वृंदावन से पधारे आचार्य शिवम मिश्रा ने शिवपुराण की दिव्य कथाओं में कार्तिकेय का जन्म, तारकासुर का वध व भगवान भोलेनाथ द्वारा त्रिपुरासुर के वध की कथा सुनाई. सोमवार को राज बनेली स्मृति पुरानी दुर्गा मंदिर जलालाबाद के प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा के छठे दिन प्रवचन सुनने के लिए सैकड़ों श्रद्धालु इस कड़ाके की ठंड में भी जमे रहे. आचार्य शिवम ने बताया कि देवताओं के कष्ट निवारण हेतु भगवान शिव के अंश से शिवपुत्र कार्तिकेय का जन्म हुआ. माता पार्वती की तपस्या और देवताओं की प्रार्थना से उत्पन्न कार्तिकेय ने बाल्यावस्था में ही अद्भुत पराक्रम दिखाया. तारकासुर, जिसने ब्रह्मा से वर पाकर देवताओं को आतंकित कर रखा था. उसका वध कर कार्तिकेय ने धर्म की पुनः स्थापना की. उन्होंने भगवान शंकर द्वारा त्रिपुरासुर के वध की कथा सुनाते हुए कहा कि जब तीनों लोकों में अधर्म बढ़ा, तब महादेव ने त्रिपुरों का संहार कर देवताओं को भयमुक्त किया. इन लीलाओं से स्पष्ट होता है कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर स्वयं प्रकट होकर सृष्टि का संतुलन स्थापित करते हैं. कथा के बीच-बीच में भगवान भोलेनाथ का भजन प्रस्तुत किया गया. जिसे सुन श्रद्धालु भक्ति के सागर में डुबकी लगाते रहे. कथा के अंत में भगवान भोलेनाथ की आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए भंडारा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में यजमान रंजन बिंद, बबीता कुमारी, बबलू साह, ललिता देवी, पप्पू साह लहेरी, माधुरी देवी, पूजा समिति के दिनेश बिंद, विजय शंकर उपाध्याय, राजेश दास, गौतम लहेरी, राजकुमार बिंद, दिलीप पोद्दार, कृष्णानंद गुप्ता सहित अन्य ने सक्रिय भूमिका निभाई.
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