संग्रामपुर. वृंदावन से पधारे कथावाचक आचार्य राम अवतार राजगुरु ने कृष्ण जन्म के प्रसंग को सुनाया. वे रविवार को प्रखंड के चंदनिया गांव स्थित काली मंदिर के प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन प्रवचन करते हुए कही. कथा के दौरान श्री कृष्ण जन्मोत्सव के साथ उसके बाल्यावस्था की झांकी दिखाई गयी. जिसे देख पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं ने नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की… के जयकारे लगाये. कथावाचक ने कहा कि जब भी धरती पर पाप का बोझ बढ़ता है, तो भगवान जन्म लेकर प्राणियों की रक्षा करते हैं. कृष्ण ने द्वापर युग में कंस आदि राक्षसों के अत्याचार से लोगों को बचाने के लिए जन्म लिया. जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, तब उनके पिता वासुदेव और मां देवकी कंस के कारागार में बंद थे. लेकिन श्रीकृष्ण का जन्म होते ही उनके शरीर की बेड़यिां अपने आप खुल गयी थी. राजा कंस का पूरा दरबार गहरी नींद में सो गया था. इसके बाद वासुदेव श्रीकृष्ण भगवान को लेकर गोकुल की ओर प्रस्थान करने लगे. उस समय आसमान में काली घनघोर घटाएं थी और यमुना का जलस्तर भी काफी बढ़ा हुआ था. लेकिन वासुदेव श्रीकृष्ण को लेकर नंद बाबा के घर की ओर बढ़े जा रहे थे. इसके बाद यमुना का जलस्तर भी कम हो गया और बारिश से प्रभु को बचाने के लिए सारे प्रबंध हो गए. कथा के बीच-बीच में भजन प्रस्तुति की जा रही थी. जिसे सुनकर श्रोता आनंदित हो रहे थे. कथा के बाद आरती और प्रसाद का वितरण किया गया. मौके पर वार्ड पार्षद सरोजनी देवी, चंदन कुमार, धर्मवीर यादव, राजेश कुमार, संजय बिंद, राहुल कुमार, दिवाकर बिंद सहित दर्जनों ग्रामीण एवं श्रद्धालु मौजूद थे.
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