आरडी एंड डीजे कॉलेज का मनाया गया 128 वां स्थापना दिवस
मुंगेर. आरडी एंड डीजे कॉलेज का 128 वां स्थापना दिवस शुक्रवार को कॉलेज के ऑडिटोरियम में समारोह पूर्वक मनाया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री विमल जैन तथा विशिष्ट अतिथि मुंगेर के पूर्व सांसद विजय कुमार विजय, मुंगेर विश्वविद्यालय के डीएसडब्लू प्रो महेश्वर मिश्र, कुलसचिव प्रो घनश्याम राय, वाणिज्य संकाय के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सुनील गुप्ता, परीक्षा नियंत्रक प्रो दशरथ प्रजापति तथा विधान पार्षद लालमोहन गुप्ता मौजूद थे. कार्यक्रम का शुभारंभ स्वस्ति वाचन और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो बिजेन्द्र कुमार ने की.मुख्य अतिथि विमल जैन ने कहा कि डीजे कॉलेज के जो भी पुराने विद्यार्थी हैं. वे प्राचार्य कपिल के समर्पण व सेवाभाव के प्रति श्रद्धावान अवश्य होंगे. उनके व्यक्तित्व, विद्वता, संवेदनशीलता से पूरे क्षेत्र के विद्यार्थी और समाज लाभान्वित हुए. एक बार जब देश के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम साहब से पूछा गया कि इसके बाद आप क्या बनना चाहेंगे तो उन्होंने कहा कि मैं पुनः शिक्षक बनना चाहूंगा. आज के बच्चे ज्यादा मेधावी हैं. उन्हें प्राध्यापक यह जरूर सीख दें कि यह जीवन किस चीज के लिए है और इस जीवन का कितना बृहत्तर महत्व है. इस जीवन को आज की चुनौतियों के समय में और भी समृद्ध कैसे कर सकते हैं.
समृद्ध गुरु-शिष्य की महत्वपूर्ण आत्मीय परंपरा जरूरी
मुंगेर के पूर्व सांसद विजय कुमार विजय ने अपने छात्र जीवन व इस कॉलेज से जुड़े हुए छात्रों के छात्र आंदोलन और राजनीतिक आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि जब जेपी आंदोलन में इस महाविद्यालय के छात्र जेल में बंद थे तो तत्कालीन प्राचार्य आचार्य कपिल जेल में छात्रों से मिलने शाम में जाया करते थे, ताकि वे छात्र उस विकट स्थिति में तनाव व अवसादग्रस्त न हों. इस बात का मैं प्रत्यक्ष साक्षी रहा हूं कि वे मुझसे भी मिलने मुंगेर कारागृह आये थे. आज पुनः वही समृद्ध गुरु-शिष्य की महत्वपूर्ण आत्मीय परंपरा विकसित करने की जरूरत है, ताकि कोई भी विद्यार्थी विषम-से-विषम परिस्थिति में भी अपने को अकेला न महसूस करे और जीवन में वह समृद्धि के नए मुकाम को प्राप्त करते हुए सफलता की राह पर अग्रसर होते रहे.
छात्र-शिक्षक अनुपात पर विशेष ध्यान देना आवश्यक
कुलसचिव ने कहा कि आज हमें छात्र-शिक्षक अनुपात पर विशेष ध्यान देना होगा. छात्रों की कक्षा में बैठने की समुचित व्यवस्था, भवन विनिर्माण पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है. इस महाविद्यालय में छात्रों की संख्या को देखते हुए भवन व कक्षा-कक्ष के निर्माण के कार्य को हर स्तर पर प्रस्तावित करके उस दिशा में अग्रसर होना जरूरी है, ताकि इस महाविद्यालय के शिक्षण की ऐतिहासिक, गौरवशाली परंपरा को बनाए रखे. डीएसडब्लू ने कहा कि आज केवल अतीत के गौरवगान का ही दिन नहीं है, बल्कि उन सभी मनीषियों के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करने का भी दिन है. जिन्होंने इस महाविद्यालय की उन्नति, उत्थान, प्रगति, समृद्धि एवं विकास के लिए अपना श्रम, शिक्षण, शुभेच्छाओं का योगदान दिया है. कॉलेज के प्राचार्य ने महाविद्यालय के प्रथम प्राचार्य डॉ वैद्यनाथ बसु के ऐतिहासिक योगदान से लेकर बाद के प्राचार्य के महती योगदान को याद करते हुए प्राचार्य कपिल का महाविद्यालय से गहरे लगाव-जुड़ाव को रेखांकित किया.————————–
””कवि-कर्म आग पर चलना है”” पुस्तक का हुआ लोकार्पण
फोटो कैप्शन – 2. पुस्तक का हुआ लोकार्पण करते
मुंगेर. स्थापना दिवस पर कॉलेज की स्मारिका सह पत्रिका ”अनन्तायन” का विमोचन किया गया. इसमें कालेज के 128 वर्ष के इतिहास पर दृष्टिपात किया गया है तथा प्राध्यापकों व विद्यार्थियों के कॉलेज से संबंधित स्मृतियों को साझा किया गया है. साथ ही इस दौरान संस्कृत विभाग के प्राध्यापक डॉ कृपाशंकर पाण्डेय के ”शंकर आनन्द” के गीत संग्रह ”कवि-कर्म आग पर चलना है” पुस्तक का लोकार्पण किया गया. बताया गया कि यह एक गीत संग्रह है. इसमें विभिन्न विषयों पर उनके कुल 27 गीत हैं.———————————————
महज औपचारिक रहा स्थापना दिवस का कार्यक्रम
मुंगेर. शहर के ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थान आरडी एंड डीजे कॉलेज का 128वां स्थापना दिवस महज एक औपचारिक कार्यक्रम बनकर रह गया. कभी गौरवशाली परंपराओं और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध यह कॉलेज अपने स्थापना दिवस पर उस उत्साह और गरिमा से वंचित दिखा, जिसके लिए यह जाना जाता रहा है. स्थापना दिवस के अवसर पर कॉलेज परिसर में एक संक्षिप्त कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें कुछ शिक्षकों और कर्मियों की उपस्थिति रही, लेकिन इसमें छात्रों की भागीदारी नगण्य रही. स्थानीय बुद्धिजीवियों और पूर्ववर्ती छात्रों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि जिस संस्थान ने वर्षों तक क्षेत्र को शिक्षित और जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उसका स्थापना दिवस इस तरह औपचारिकता तक सीमित रह जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. कई छात्रों ने कहा कि स्थापना दिवस उनके लिए प्रेरणा का स्रोत होना चाहिए था, लेकिन इस बार उन्हें इससे जुड़ने का अवसर ही नहीं मिला.
