भजन के साथ भागवत कथा संपन्न

भजन के साथ भागवत कथा संपन्न फोटो संख्या : 21,22फोटो कैप्सन : कथा वाचन करते पंडित रामअवतार एवं उपस्थित श्रद्धालु प्रतिनिधि, संग्रामपुर —————-संग्रामपुर के मौनी बाबा मंदिर के समीप श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का समापन गुरुवार को किया गया. कथावाचक वृंदावन के पंडित राम अवतार राजगुरू व्यासपीठ ने सात दिन गीत-संगीत एवं भजन के […]

भजन के साथ भागवत कथा संपन्न फोटो संख्या : 21,22फोटो कैप्सन : कथा वाचन करते पंडित रामअवतार एवं उपस्थित श्रद्धालु प्रतिनिधि, संग्रामपुर —————-संग्रामपुर के मौनी बाबा मंदिर के समीप श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का समापन गुरुवार को किया गया. कथावाचक वृंदावन के पंडित राम अवतार राजगुरू व्यासपीठ ने सात दिन गीत-संगीत एवं भजन के साथ भागवत के सभी स्कंदों की विस्तृत व्याख्या की. इस दौरान झांकी की भी मनमोहक प्रस्तुति की गयी. इस दौरान परमहंस दास हवन कार्य साधन एवं कैलाश शर्मा द्वारा मूल पाठ जारी रहा. समापन के मौके पर कथावाचक पंडित राजगुरु व्यास पीठ जी ने कहा कि जिन श्रोता भक्तों ने सातों दिन भागवत कथा का रसा स्वादन किया वे पुण्य के भागी हैं. प्रथम दिन कलश शोभा यात्रा के बाद कथा का प्रारंभ हुआ जो सातों दिन बारी-बारी से श्रृष्टि वर्णन, शिव सति चरित्र, वामन लीला, कृष्ण जन्मोत्सव, गोवर्धन पूजा, रुकमिणी विवाह, सुदामा चरित्र की व्याख्या के बाद गुरुवार को हवन एवं भंडारा के बाद समाप्त हो गया. अंतिम दिन ब्यास पीठ जी ने भागवत कथा की महत्ता बताते हुए कहा कि इसमें 18 हजार श्लोक संग्रहित है. उन्होंने कहा कि श्री का अर्थ होता है लक्ष्मी. भद् का अर्थ है अहंकार. भागवत शब्द में भक्ति, ज्ञान, वैराग्य एवं त्याग संग्रहित है. जब लक्ष्मी आती है तो मद होता है. परंतु श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से श्री तो प्राप्ति होती है लेकिन इसके साथ-साथ भक्ति, ज्ञान, वैराग्य एवं त्याग की भी प्राप्ति होती है. उन्होंने ” धन बिनु धर्म न होई खगेशा ”. अर्थात धन धर्म से एवं धर्म धन से जुड़ा है. जहां धर्म है वहां लक्ष्मी, सरस्वती, काली सभी विद्यमान रहते हैं. ब्यास पीठ जी ने कहा कि श्रीकृष्ण जी अपनी लाला कर पृथ्वी से जाने लगे तो सभी देवताओं ने उन्हें उपस्थित होकर अपने-अपने लोकों में जाने का आग्रह किया. परंतु नारायण ने यहां भी भक्तों का साथ दिया. कथा का समापन श्रीवन नारायण, नारायण, हरि-हरि के भजन के साथ किया गया. मुख्य यजमान की भूमिका मनोज साह आध्यात्मानंद ने निभाई. कार्यक्रम को सफल बनाने में बद्री प्रसाद भगत, पप्पू भगत, विजय भगत, सुनील भगत, घनश्याम भगत, विनोद केसरी, राजकुमार, दिलीप तिवारी, डॉ भोला भगत मुख्य रूप से मौजूद थे.

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