मुंगेर होमियो पैथिक चिकित्सक एसोसिएशन के आह्वान पर सोमवार से होमियो पैथिक क्लिनिक व दुकान बंद हो गयी. जो बुधवार तक बंद रहेगी. अध्यक्ष शैल कुमारी एवं एसके मेहता ने बताया कि प्रथम चरण में शांति मार्च एवं दुकान व क्लिनिक बंद कर हमलोग अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे है. दूसरे राज्यों में भी शराब […]
मुंगेर होमियो पैथिक चिकित्सक एसोसिएशन के आह्वान पर सोमवार से होमियो पैथिक क्लिनिक व दुकान बंद हो गयी. जो बुधवार तक बंद रहेगी. अध्यक्ष शैल कुमारी एवं एसके मेहता ने बताया कि प्रथम चरण में शांति मार्च एवं दुकान व क्लिनिक बंद कर हमलोग अपना विरोध प्रदर्शन कर रहे है.
दूसरे राज्यों में भी शराब बंदी है. लेकिन इस तरह का कानून बना कर होमियोपैथिक चिकित्सक व दुकानदारों को तंग नहीं किया जा रहा है. अगर हमारी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को तेज किया जायेगा.
मुंगेर : टीएचएच होमियोपैथ मेडिकल कॉलेज मुंगेर के शासी निकाय के सदस्य डॉ नीतीश चंद्र दूबे ने कहा कि सरकार औषधि और मदिरा में अंतर समझे. प्रतिबंधित दवाओं और शराब बंदी का अनुपालन निष्ठा से करना चाहिए. लेकिन मदिरा के नाम पर जीवन रक्षक होमियोपैथ दवा पर अंकुश लगाने की नीति चिंताजनक है.
उन्होंने कहा कि शराब पर प्रतिबंध के चलते होमियोपैथी की दवाओं पर निशाना साधने की बजाय सरकार द्वारा जन स्वास्थ्य के खतरनाक पाई गयी तमाम प्रतिबंधित एलोपैथिक दवाओं और कफ सिरप की बिक्री बंद करना चाहिए. जो कि मेडिकल स्टोर्स पर बिना चिकित्सक के परामर्श के भी मिल जाती है और उनके दुरुपयोग के मामले सामने आते ही रहते है. उन्होंने कहा कि होमियोपैथ चिकित्सा पद्धति एक ऐसी पद्धति है जिसका साइड इफेक्ट नहीं होता है.
लेकिन बिहार सरकार के नये उत्पाद नीति के कारण आज होमियोपैथ चिकित्सा पद्धति खुद खतरे में पड़ गयी है. जिस पर सरकार को पुर्नविचार करने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि शराब बंदी का हम समर्थन करते है. लेकिन सरकार औषधि और मदिरा के अंतर को समझ नहीं पा रही है. जिसके कारण सरकार ने लेकिन उसके लिए बनायी गयी उत्पाद नीति में संशोधन की जरूरत है. अगर राज्य सरकार को होमियोपैथ दवाओं की बिक्री व भंडारण पर रोक लगाना ही था तो पहले सीसीएच या सीसीआरएच की अनुमति प्राप्त करना चाहिए था. उन्होंने कहा कि होमियोपैथ दवा है न कि शराब.
इस चिकित्सा पद्धति का उपयोग आम जनता एवं असाध्य बीमारियों में आधुनिक चिकित्सा पद्धति से थके-हारे मरीजों की चिकित्सा के लिए की जाती है. सरकार के इस निर्णय से वैसे मरीजों के मौलिक अधिकारों का हनन होता है. उन्होंने कहा कि 450 एमएल के दवाओं पर रोक लगाने से पहले कम से कम सरकार को होमियोपैथ चिकित्सक व दुकानदार को 6 महीने का समय देना चाहिए. उन्होंने कहा कि 6 अप्रैल के बाद होमियोपैथ के चिकित्सक भूख हड़ताल करेंगे.