पर्यावरण बचाने के लिए सिर्फ भाषण नहीं, व्यवहार बदलने की जरूरत: एमजीसीयू के युवा संवाद में संदेश

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (एमजीसीयू) के मीडिया अध्ययन विभाग में 'युवा संवाद' कार्यक्रम का आयोजन किया गया. 'पंच परिवर्तन आधारित युवा संकल्प' विषय पर जल, वायु प्रदूषण और सिंगल यूज प्लास्टिक पर चर्चा हुई. युवाओं को व्यवहार परिवर्तन के लिए '3पी' का मंत्र दिया गया.

MGCU Motihari Yuva Samvad: महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (एमजीसीयू) के मीडिया अध्ययन विभाग में शनिवार को 'युवा संवाद' कार्यक्रम का आयोजन किया गया. 'पंच परिवर्तन आधारित युवा संकल्प' विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जिम्मेदारी और व्यवहार परिवर्तन पर विस्तार से चर्चा हुई.

कार्यक्रम की शुरुआत मीडिया अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अंजनी कुमार झा के स्वागत उद्बोधन से हुई.

जल और वायु प्रदूषण पर जताई चिंता

पूर्व बीपीएससी सदस्य एवं मीडिया अध्ययन विभाग के प्रो. अरुण कुमार भगत ने जल और वायु प्रदूषण को गंभीर चुनौती बताते हुए पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया.

उन्होंने लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग से बचने और व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस प्रयास करने की अपील की.

'3पी' के जरिए दिया व्यवहार परिवर्तन का संदेश

मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक शिवम ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा और सेमिनार तो लगातार हो रहे हैं, लेकिन सबसे जरूरी बात इन विचारों को व्यवहार में उतारना है.

उन्होंने युवाओं को '3पी' का संदेश देते हुए कहा कि पहला 'पी' जल संरक्षण, दूसरा 'पी' सिंगल यूज प्लास्टिक से परहेज और तीसरा 'पी' अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनकी नियमित देखभाल करना है.

उन्होंने कहा कि समाज यदि सामूहिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़े, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होगा.

कार्यक्रम के अंत में दिलाए गए 10 संकल्प

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों को 10 संकल्प दिलाए गए. इनमें पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी अपनाने, मातृभाषा का सम्मान, नागरिक कर्तव्यों का पालन, सामाजिक समरसता, सेवा, स्वास्थ्य और राष्ट्र प्रथम जैसे संकल्प शामिल रहे.

शिक्षकों और शोधार्थियों की रही सहभागिता

कार्यक्रम का संचालन मीडिया अध्ययन विभाग के सहायक आचार्य डा. सुनील दीपक घोडके ने किया, जबकि अंत में सहायक आचार्य डा. परमात्मा कुमार मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

इस अवसर पर डा. साकेत रमन, डा. उमा यादव, डा. अरुण दुबे सहित विभाग के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे.


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अमृतेश 15 वर्षों से प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. खबर पर हमेशा पैनी नजर रखने वाले अमृतेश को क्षेत्रीय और जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. वर्तमान में ये डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में अपनी लेखनी के जरिए लगातार सक्रिय हैं.

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