Minor Missing Cases: मोतिहारी हरसिद्धि थाना क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों में नाबालिग लड़कियों के कथित रूप से प्रेमी के साथ घर से भागने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिसको लेकर स्थानीय पुलिस प्रशासन ने गहरी चिंता व्यक्त की है. हरसिद्धि थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने क्षेत्र के सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखें और उन्हें बेहतर शिक्षा के प्रति जागरूक करें.
Motihari News: कम उम्र के बच्चों में बढ़ रहा है भटकाव
थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में कम उम्र में नाबालिग लड़कियों के प्रेम-प्रसंग में पड़कर घर से चले जाने के कई मामले सामने आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि कई मामलों में यह भी देखा गया है कि लड़का-लड़की के साथ रहने या उनके वीडियो बनाने के बाद उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाता है, जिससे बाद में दोनों परिवारों को भारी सामाजिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है.कहा कि आमतौर पर 12 से 15 वर्ष की उम्र की बच्चियां नासमझी के कारण बिना भविष्य के परिणामों के गंभीर परिणामों को समझे बिना गलत कदम उठा लेती हैं. उस उम्र में उन्हें यह रास्ता आकर्षक लग सकता है, लेकिन बाद में उन्हें जीवनभर कई तरह की सामाजिक, मानसिक और पारिवारिक परेशानियों से जूझना पड़ता है.
पुलिस प्रशासन और बाल संरक्षण संस्थाओं पर बढ़ता दबाव
थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाओं का नकारात्मक असर केवल संबंधित पीड़ित परिवार पर ही नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज और पुलिस प्रशासन पर भी पड़ता है. नाबालिगों से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों में पुलिस को बेहद सख्त कानूनी प्रक्रियाओं के तहत अपनी कार्रवाई करनी पड़ती है. इसके अलावा, इन मामलों के कारण बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न संस्थानों और न्याय व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव लगातार बढ़ रहा है.
अभिभावकों के लिए सख्त और जरूरी सलाह
बच्चों को इस तरह के गलत रास्तों से बचाने के लिए थानाध्यक्ष ने अभिभावकों को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
- संवाद और संवादहीनता खत्म करें: बच्चों को केवल डांटने-फटकारने के बजाय उनके साथ दोस्ताना संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है.
- शिक्षा को दें प्राथमिकता: अभिभावक अपनी बेटियों और बेटों की पढ़ाई-लिखाई पर विशेष ध्यान दें. समय-समय पर स्कूल और कॉलेज जाकर शिक्षकों से उनके व्यवहार, उपस्थिति और पढ़ाई की प्रगति की जानकारी लेते रहें.
- व्यवहार पर रखें पैनी नजर: यदि परिवार को बच्चे के स्वभाव या दैनिक व्यवहार में किसी भी प्रकार का असामान्य बदलाव या संदेह नजर आता है, तो समय रहते उससे प्यार से बातचीत करनी चाहिए.
- अनुशासन और मार्गदर्शन: परिवार का सही **अनुशासन और उचित मार्गदर्शन ही बच्चों कोशोषण या किसी भी प्रकार के गलत कदम उठाने से रोकने में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
समाज के सभी वर्गों से मिलकर प्रयास करने की अपील
अंत में हरसिद्धि थानाध्यक्ष ने सभी अभिभावकों से यह अपील की कि वे बच्चों की शिक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएं, उन्हें अपनी दिनचर्या में से पर्याप्त समय दें और उनके साथ मित्रवत व्यवहार करते हुए उनकी किशोर अवस्था की समस्याओं को समझने का प्रयास करें. कम उम्र में उठाया गया कोई भी एक गलत कदम बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को पूरी तरह अंधकारमय बना सकता है. इसलिए यह समय की मांग है कि परिवार, विद्यालय और समाज तीनों मिलकर संयुक्त रूप से बच्चों को सही दिशा प्रदान
