मोतिहारी: पेट्रोल-डीजल ने बिगाड़ा रसोई का बजट, थोक मंडियों में 15 फीसदी तक महंगी हुईं खाद्य सामग्रियां

Motihari News: मोतिहारी में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से परिवहन लागत बढ़ी. थोक मंडियों में चावल और सरसों तेल समेत अन्य खाद्य सामग्रियों के दाम 10 से 15 फीसदी तक महंगे, रसोई का बजट बिगड़ा. जानिए खबर विस्तार से…

Motihari News: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का सीधा और गहरा असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है. ईंधन महंगा होने के कारण परिवहन लागत (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) में भारी वृद्धि हुई है, जिसके कारण खाद्यान्न, दूध, फल और सब्जियों सहित अन्य सभी आवश्यक वस्तुओं के दाम आसमान छूने लगे हैं. इससे जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण इलाकों की आम जनता को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि दूसरे राज्यों से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से आने वाले दैनिक उपयोग के सामानों की ढुलाई लागत बढ़ने के कारण उनके थोक मूल्य में काफी वृद्धि हुई है. इसका सीधा असर बाजार में बिकने वाले लगभग सभी उपभोक्ता उत्पादों पर देखने को मिल रहा है.

रसोई का बिगड़ा बजट

ईंधन महंगा होने से मालभाड़ा बढ़ गया है, जिसके कारण दूसरे राज्यों से मोतिहारी की मंडियों में आने वाले सामानों की थोक कीमतों में सीधे 10 से 15 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है. शहर के थोक बाजार में ब्रांडेड कंपनियों के चावलों की कीमत काफी बढ़ गयी है. महज 10 दिन पहले तक जो उन्नत क्वालिटी का चावल 60 से 70 रुपये प्रति किलो मिलता था, उसकी कीमत में दो से तीन रुपये प्रति किलो की वृद्धि हो चुकी है. इसी तरह, मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई की मुख्य जरूरत माने जाने वाले सरसों तेल, जो पहले 160 से 170 रुपये प्रति लीटर मिलता था, उसके पैकेट में पांच से 10 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है. उपभोक्ताओं का कहना है कि लगातार बढ़ रही इस महंगाई के कारण अब घर का मासिक खर्च संभालना बेहद कठिन होता जा रहा है

मध्यम आय वर्ग के सामने आर्थिक संकट

आम लोगों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल और रसोई के सामान की बढ़ती महंगाई के कारण पूरे घर का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है. रोजमर्रा के खर्चों में लगातार इजाफा होने से परिवारों को गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए वर्तमान स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण होती जा रही है क्योंकि उनकी आमदनी सीमित है और खर्चे लगातार बढ़ रहे हैं.

बस और ऑटो का सफर भी हुआ महंगा

ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण अब यात्रा करना भी पहले की तुलना में अधिक खर्चीला हो गया है. जिला मुख्यालय में चलने वाले ऑटो, बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के किराए में मनमानी वृद्धि होने से दैनिक यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.

मोतिहारी से अभिषेक कुमार की रिपोर्ट

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Published by: Purushottam Kumar

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