Motihari News: जिला प्रशासन के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष जागरूकता अभियान के तहत शनिवार (6 जून 2026) को बंजरिया प्रखंड की सिसवा पूर्वी पंचायत सरकार भवन परिसर में राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम द्वारा एक महत्वपूर्ण आपदा जागरूकता एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया. इस कड़क कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आगामी मानसूनी सीजन और अन्य आकस्मिक परिस्थितियों को देखते हुए आम ग्रामीणों को विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं के समय बिना घबराए त्वरित, सटीक और सुरक्षित प्रतिक्रिया देने के लिए पूरी तरह तैयार करना था.
एसडीआरएफ के जवानों ने सिखाए ये 5 कड़े मंत्र
प्रशिक्षण के दौरान एसडीआरएफ की विशेषज्ञ टीम ने पंचायत भवन परिसर में मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों को आपातकालीन स्थितियों से कड़ाई से निपटने के लिए कई व्यावहारिक और जीवन रक्षक गुर सिखाए. इस दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित अतिसंवेदनशील बिंदुओं पर लाइव डेमो और प्रशिक्षण दिया गया:
- आग से बचाव: अचानक आग लगने की स्थिति में बिना घबराए और मानसिक संतुलन खोए सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने और राहत कार्य चलाने के उपाय बताए गए.
- गैस सिलेंडर सुरक्षा: घरों में रसोई गैस सिलेंडर में आग लगने पर घरेलू संसाधनों (जैसे गीली बोरी या सूती चादर) का उपयोग कर उसे सुरक्षित रूप से नियंत्रित करने की कड़क तकनीक का लाइव प्रदर्शन किया गया.
- वज्रपात से सुरक्षा: आकाशीय बिजली (वज्रपात) चमकने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के तरीकों की विस्तृत जानकारी दी गई.
- बाढ़ प्रबंधन: बाढ़ के समय जलस्तर बढ़ने पर स्वयं को सुरक्षित रखने, मवेशियों को बचाने और राहत शिविरों तक सुरक्षित पहुंचने के उपाय समझाए गए.
- पानी में बचाव: नदी या तालाब में डूबते हुए व्यक्ति को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामानों (जैसे प्लास्टिक की बोतलें, बांस) की मदद से सुरक्षित बाहर निकालने की जीवन रक्षक तकनीकें सिखाई गईं.
युवाओं और महिलाओं ने किया कड़ा अभ्यास
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम में सिसवा पूर्वी पंचायत की मुखिया तान्या प्रवीण और मुखिया प्रतिनिधि फैजुर रहमान मुन्ना की विशेष उपस्थिति रही. कार्यक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय वार्ड सदस्यों और जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और स्कूली विद्यार्थियों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई प्रतिभागियों ने स्वयं आगे आकर जवानों की देखरेख में इन जीवन रक्षक तकनीकों और उपकरणों का कड़ा अभ्यास भी किया.
जागरूकता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी
इस अवसर पर उपस्थित प्रबुद्ध नागरिकों और पंचायत प्रतिनिधियों ने एक स्वर में माना कि आपदा के समय सही जानकारी और तुरंत की गई सूझबूझ भरी कार्रवाई कई बहुमूल्य जिंदगियों को समय रहते बचा सकती है. ‘जागरूकता ही सुरक्षा की पहली सीढ़ी है’ के कड़े संदेश के साथ एसडीआरएफ की टीम ने पंचायतवासियों को संकट के दौरान संयम और धैर्य से काम लेने का मूल मंत्र दिया. कार्यक्रम के समापन पर मुखिया और स्थानीय ग्रामीणों ने आपदा प्रबंधन के ये बेहतरीन गुर सिखाने के लिए पूरी एसडीआरएफ टीम के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त किया.
मोतिहारी बंजरिया से राज निखिल का रिपोर्ट
