Motihari Industrial Area: धान और गन्ने की खेती के लिए पहचान रखने वाला पूर्वी चंपारण अब औद्योगिक विकास की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाने जा रहा है. जिले के सुगौली, आदापुर और रामगढ़वा प्रखंडों को नया औद्योगिक हब बनाने की कवायद तेज हो गई है. जिला उद्योग विभाग के प्रस्ताव को जिला प्रशासन से मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) को भेज दिया गया है. मंजूरी मिलते ही तीनों क्षेत्रों में आधुनिक फूड प्रोसेसिंग उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया शुरू होगी.
105 एकड़ जमीन पर विकसित होगा औद्योगिक क्लस्टर
जिला उद्योग विभाग ने तीनों प्रखंडों में कुल 105 एकड़ भूमि चिह्नित की है. इसमें सुगौली में 34 एकड़, रामगढ़वा में 37 एकड़ और आदापुर में 34 एकड़ जमीन शामिल है. जिला उद्योग विभाग के महाप्रबंधक अंकित कुमार ने बताया कि भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब बियाडा की अंतिम मंजूरी का इंतजार है.
कृषि आधारित उद्योगों को मिलेगी प्राथमिकता
इस औद्योगिक क्लस्टर में मुख्य रूप से फूड प्रोसेसिंग उद्योग स्थापित किए जाएंगे. कृषि प्रधान पूर्वी चंपारण में धान, मक्का, गन्ना, फल और सब्जियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है. ऐसे में यहां चावल मिल, आटा मिल, मक्का आधारित उद्योग और फल-सब्जी प्रसंस्करण इकाइयों के लिए कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता रहेगी. इससे किसानों को भी अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी.
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार, पलायन होगा कम
जिले में उद्योग स्थापित होने से हजारों स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. अब तक रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने वाले कुशल और अकुशल कामगारों को अपने जिले में ही काम मिलने की उम्मीद है. प्रशासन का मानना है कि इससे पलायन पर भी प्रभावी रोक लगेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
नेपाल सीमा की नजदीकी बनेगी बड़ी ताकत
सुगौली, आदापुर और रामगढ़वा की सबसे बड़ी विशेषता इनका नेपाल सीमा और रक्सौल के करीब होना है. इस वजह से यहां तैयार होने वाले उत्पादों की आपूर्ति बिहार के साथ-साथ नेपाल के बाजारों तक भी आसानी से की जा सकेगी. यह भौगोलिक स्थिति निवेशकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकती है.
मंजूरी मिलते ही शुरू होगा इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण
महाप्रबंधक अंकित कुमार के अनुसार, बियाडा से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और अंतिम स्वीकृति मिलते ही औद्योगिक क्षेत्र में आधारभूत संरचना विकसित करने का काम शुरू कर दिया जाएगा. इसके तहत विशेष बिजली सब-स्टेशन, चौड़ी सड़कें, जल निकासी की बेहतर व्यवस्था और पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी. प्रशासन को उम्मीद है कि इससे बाहरी निवेश आकर्षित होगा और पूर्वी चंपारण की आर्थिक तस्वीर बदलने में मदद मिलेगी.
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