Motihari: हनुमान के लिए राम ही स्वार्थ और राम ही परमार्थ : व्यास

राणीसती मंदिर में शनिवार को हनुमत सेवा समागम द्वारा 116 वें सामूहिक सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया.

Motihari: चकिया. स्थानीय राणीसती मंदिर में शनिवार को हनुमत सेवा समागम द्वारा 116 वें सामूहिक सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया. इस संगीतमय सुंदरकांड में बड़ी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालुओं ने भाग लिया. व्यास रामाधार जी व नंदकिशोर जी के सानिध्य में उपस्थित श्रद्धालुओं ने लयबद्ध सुंदरकांड का पाठ किया.इस दौरान व्यास रामाधार जी ने कहा कि हनुमान वह नहीं करते जो प्रभु कहते हैं बल्कि वे वह सब करते हैं जो प्रभु चाहते हैं. उन्होंने कहा कि सेवक सोई जो स्वामी हित करई अर्थात अपने हित अनहित की चिंता सच्चे सेवक को कदापि नहीं होती.हनुमान के हृदय में प्रभु श्रीराम का कोई विकल्प नहीं है.उनके चित्त में श्रीराम के अतिरिक्त एक अणु की भी उपस्थिति नहीं है.इसके पूर्व मुख्य यजमान संजय शर्मा ने सपत्नीक मारुति नंदन का विधिवत पूजन कर अखंड ज्योति का आह्वान किया. कार्यक्रम के दौरान समागम के कलाकारों की आकर्षक प्रस्तुतियों पर उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए. मौके पर अध्यक्ष भरत बजाज,विजय लोहिया, शंभू तुलस्यान, नवीन बजाज, संतोष सेकसरिया, अर्जुन झुनझुनवाला, आशदेव कुमार, विष्णु तुलस्यान सहित काफी संख्या में महिला व पुरुष श्रद्धालु मौजूद थे.

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By HIMANSHU KUMAR

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