जहां सुई-धागे से बदल रही महिलाओं की जिंदगी... अब इसी केंद्र से बनेगी स्कूल के बच्चों की यूनिफॉर्म

मधुबन का जीविका जिला स्तरीय कटिंग एवं सिलाई केंद्र अब सिर्फ आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक ही नहीं, बल्कि सरकारी मध्य विद्यालयों की यूनिफॉर्म भी तैयार करेगा. यह केंद्र ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार का एक सफल मॉडल बन चुका है.

Madhuban Women Empowerment: मधुबन का जीविका जिला स्तरीय कटिंग एवं सिलाई केंद्र अब सिर्फ आंगनबाड़ी बच्चों की पोशाक तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा. विभागीय तैयारी के अनुसार, जल्द ही यहां सरकारी मध्य विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की यूनिफॉर्म भी तैयार की जाएगी. इससे उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

यह केंद्र आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की एक सफल मिसाल बन चुका है.

हर दिन तैयार हो रहे 2100 पोशाक

जीविका के इस केंद्र में प्रतिदिन औसतन 2,100 पोशाक तैयार किए जा रहे हैं. यहां कटिंग, सिलाई, फिनिशिंग और आयरन तक की पूरी प्रक्रिया एक ही परिसर में पूरी होती है.

गुणवत्ता की नियमित निगरानी के कारण तैयार पोशाक निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं और समय पर जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाए जा रहे हैं.

महिलाओं के जीवन में आया बड़ा बदलाव

केंद्र की सबसे बड़ी ताकत यहां कार्यरत जीविका दीदियां हैं. वर्तमान में यहां 21 सिलाई कर्मी, एक आयरन कर्मी और एक गणक नियमित रूप से कार्य कर रहे हैं.

कभी केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज अपने हुनर के दम पर परिवार की आय बढ़ाने के साथ बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को भी मजबूत बना रही हैं.

केंद्र में कार्यरत सोनी, सरिता, रेखा, अनु, बेबी और नूर नेशा ने बताया कि इस काम ने उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है और समाज में नई पहचान भी दिलाई है.

अब मध्य विद्यालयों के लिए भी बनेगी यूनिफॉर्म

जीविका विभाग की योजना के तहत अगले चरण में सरकारी मध्य विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के लिए भी पोशाक की सिलाई इसी केंद्र से कराई जाएगी.

इससे उत्पादन में वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का अवसर मिलेगा.

सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का मॉडल

स्थानीय स्तर पर पोशाक निर्माण होने से आंगनबाड़ी केंद्रों तक समय पर आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है. साथ ही गुणवत्ता पर भी बेहतर नियंत्रण रखा जा रहा है.

ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में यह केंद्र जिले के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है.

पदाधिकारी ने क्या कहा?

जीविका के क्षेत्रीय समन्वयक रजनीश कुमार ने कहा कि स्थानीय स्तर पर महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ गुणवत्तापूर्ण पोशाक समय पर उपलब्ध कराना इस केंद्र की सबसे बड़ी उपलब्धि है.

उन्होंने बताया कि आने वाले समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की योजना पर भी काम किया जा रहा है.


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By Shashi chandra tiwary

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