Motihari News: मोतिहारी. मोतिहारी प्रखंड के चंद्रहिया स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के एक लेखापाल के वेतन स्थगन और प्रतिनियुक्ति का मामला अब शिक्षा विभाग की कार्यशैली को लेकर चर्चा में है. परिजनों और शिक्षाविदों का कहना है कि विभिन्न कारणों का हवाला देकर करीब तीन वर्षों से लेखापाल का वेतन रोका गया है. साथ ही उन्हें मूल पदस्थापन स्थल से हटाकर पिपरकोठी में प्रतिनियुक्त कर दिया गया है.
मामले में परिजनों की ओर से यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि जिस अवधि से जुड़े मामले को लेकर लेखापाल पर कार्रवाई की गयी, उसी व्यवस्था में वित्तीय भुगतान से जुड़े तत्कालीन प्रधानाध्यापक और वार्डन की भूमिका पर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई.
डीएम के संज्ञान में आने के बाद विभाग ने दिया निर्देश
मामला जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव के संज्ञान में आने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन गिरी की ओर से लेखापाल को पांच दिनों के लिए कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में प्रतिनियुक्त किया गया है.
उन्हें विद्यालय की संचिकाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. इसके बाद लेखापाल के मामले में विभागीय स्तर पर गतिविधियां तेज हुई हैं.
परिजनों का कहना है कि लेखापाल का मुख्य दायित्व संचिका और लेखा संबंधी अभिलेखों का संधारण करना है. वहीं, वित्तीय भुगतान की प्रक्रिया में प्रधानाध्यापक और वार्डन की भी भूमिका रहती है. ऐसे में उनका कहना है कि किसी मामले में कार्रवाई करते समय सभी संबंधित कर्मियों की भूमिका के आधार पर एकरूपता बरती जानी चाहिए.
तीन साल से वेतन बंद होने पर उठ रहे सवाल
परिजनों के अनुसार लेखापाल का वेतन करीब तीन वर्षों से स्थगित है. उन्हें मूल पदस्थापन स्थल से हटाकर पिपरकोठी में प्रतिनियुक्त किये जाने का भी मामला सामने आया है.
परिजनों ने आरोप लगाया कि हाल में संचिकाएं उपलब्ध कराने के लिए संबंधित कर्मियों के साथ भेजकर वीडियो रिकॉर्डिंग कराने का निर्देश दिया गया. उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से संबंधित कर्मचारी के प्रति ऐसी धारणा बन सकती है, मानो वह किसी गंभीर आपराधिक मामले का आरोपित हो.
परिजनों ने विभाग से कार्रवाई के दौरान प्रक्रिया के साथ कर्मचारी की गरिमा का भी ध्यान रखने की मांग की है.
दूसरे कर्मचारी की उपस्थिति और वेतन की भी जांच की मांग
लेखापाल के परिजनों ने इसी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कार्यरत चपरासी दयानंद को लेकर भी जांच की मांग उठायी है. उनका आरोप है कि चपरासी लंबे समय से विद्यालय से गायब हैं, फिर भी उनका वेतन भुगतान हो रहा है.
परिजनों ने इस मामले में चपरासी की उपस्थिति और भुगतान की जांच की मांग की है. उनका कहना है कि आवश्यकता होने पर CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह जांच की जाये कि संबंधित कर्मचारी विद्यालय में कब-कब मौजूद रहे.
निष्पक्ष जांच की मांग
परिजनों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि लेखापाल के वेतन स्थगन, मूल पदस्थापन स्थल से हटाकर प्रतिनियुक्ति और वित्तीय भुगतान से जुड़े अन्य कर्मियों की भूमिका की भी विभागीय स्तर पर जांच होनी चाहिए.
इसके साथ ही चपरासी के संबंध में लगाये गये आरोपों की भी जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गयी है. फिलहाल जिलाधिकारी के संज्ञान के बाद लेखापाल को पांच दिनों के लिए कस्तूरबा विद्यालय में प्रतिनियुक्त कर संचिकाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
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