Bihar Mid Day Meal Menu: बिहार में मानसून के दौरान बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना में बदलाव किया है. अब सरकारी स्कूलों में बनने वाले भोजन में कुछ खास सब्जियों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. विभाग ने सभी जिलों को नई गाइडलाइन जारी कर दी है.
इन सब्जियों को मिड-डे मील से हटाया गया
नई व्यवस्था के तहत सरकारी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में बनने वाले मिड-डे मील में अब बैंगन, भिंडी, पत्ता गोभी और सभी तरह के पत्तेदार साग का उपयोग नहीं किया जाएगा.
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि इनकी जगह स्थानीय स्तर पर मिलने वाली ताजी और सुरक्षित मौसमी सब्जियों का इस्तेमाल किया जाए.
सभी जिलों को भेजा गया आदेश
शिक्षा विभाग ने यह निर्देश सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को भेज दिया है. विभाग ने कहा है कि बारिश के मौसम में भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.
अधिकारियों को स्कूलों में रसोईघर की सफाई, खाद्य सामग्री के रखरखाव और भोजन बनाने की प्रक्रिया पर नजर रखने को कहा गया है.
मानसून में संक्रमण का बढ़ जाता है खतरा
शिक्षा विभाग के अनुसार बारिश के मौसम में कुछ हरी सब्जियों और पत्तेदार सब्जियों में कीड़े और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. अगर इनकी सही तरीके से सफाई नहीं की जाए तो बच्चों को पेट से जुड़ी समस्या, फूड प्वाइजनिंग और अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है.
इसी वजह से विभाग ने एहतियात के तौर पर इन सब्जियों को कुछ समय के लिए मिड-डे मील के मेन्यू से हटाने का फैसला लिया है.
ताजी और स्थानीय सब्जियों पर रहेगा जोर
नई गाइडलाइन में स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि ऐसी सब्जियों का इस्तेमाल किया जाए, जो ताजी हों और स्थानीय स्तर पर आसानी से उपलब्ध हों. इसके अलावा भोजन बनाने से पहले सब्जियों और अन्य खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांचने को भी कहा गया है.
विभाग ने साफ पानी के इस्तेमाल और भोजन की स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है.
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स्कूलों में होगी नियमित जांच
मिड-डे मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिला और प्रखंड स्तर के अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे. निरीक्षण के दौरान देखा जाएगा कि भोजन तय नियमों के अनुसार तैयार हो रहा है या नहीं. अगर किसी स्कूल में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सकती है.
बच्चों की सुरक्षा को लेकर लिया गया फैसला
शिक्षा विभाग का कहना है कि मिड-डे मील का उद्देश्य सिर्फ बच्चों को खाना उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित और पौष्टिक भोजन देना भी है. मानसून के दौरान संक्रमण के खतरे को देखते हुए यह बदलाव किया गया है, ताकि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को बेहतर और सुरक्षित भोजन मिल सके.
