Madhubani News: जिले में खुरहा-मुंहपका (एफएमडी) रोग से बचाव के लिए चल रहे पशु टीकाकरण अभियान पर वैक्सीनेटरों के आंदोलन का असर पड़ने लगा है. पशुपालन विभाग के अनुसार 15 जुलाई से शुरू हुए अभियान के तहत 45 दिनों में नौ लाख पशुओं का टीकाकरण किया जाना है, लेकिन मानदेय की मांग को लेकर वैक्सीनेटरों की नाराजगी के कारण अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गई है.
21 प्रखंडों में अब तक केवल 45 हजार पशुओं का टीकाकरण
विभाग के अनुसार जिले के 21 प्रखंडों में 350 से अधिक वैक्सीनेटर कई वर्षों से टीकाकरण कार्य कर रहे हैं. हालांकि इस बार मानदेय की मांग को लेकर अधिकांश वैक्सीनेटर अभियान में सक्रिय भागीदारी नहीं कर रहे हैं. इसके चलते अब तक केवल लगभग 45 हजार पशुओं का ही टीकाकरण हो सका है.
प्रति पशु पांच रुपये भुगतान का विरोध
जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. राजेश ने बताया कि पहले प्रति पशु टीकाकरण पर तीन रुपये दिए जाते थे, जिसे बढ़ाकर पांच रुपये कर दिया गया है. इसके बावजूद वैक्सीनेटर मानदेय की मांग को लेकर टीकाकरण कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं.
वहीं वैक्सीनेटर संघ के प्रखंड अध्यक्ष रमन कुमार यादव ने कहा कि वैक्सीनेटर दिनभर गांव-गांव जाकर पशुओं का टीकाकरण करते हैं, लेकिन प्रति पशु केवल पांच रुपये मिलते हैं. उन्होंने मांग की कि सरकार मानदेय की व्यवस्था करे, अन्यथा आंदोलन जारी रहेगा.
45 दिनों में नौ लाख पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य
पशुपालन विभाग ने जिले में 45 दिनों के भीतर नौ लाख पशुओं का टीकाकरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. हालांकि वर्तमान स्थिति को देखते हुए निर्धारित अवधि में लक्ष्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है.
जिला पशुपालन पदाधिकारी अमित कुमार ने बताया कि खुरहा-मुंहपका रोग होने पर पशुओं के खुर और मुंह में घाव हो जाते हैं, जिससे उनकी जान को भी खतरा हो सकता है. उन्होंने कहा कि वैक्सीनेटरों के आंदोलन के बावजूद सभी पशुओं का टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए विभाग आवश्यक कदम उठा रहा है.
