Madhubani Jail News: मंडल कारा रामपट्टी में बंद एक विचाराधीन कैदी की मौत से जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. मृतक की पहचान अरेर थाना क्षेत्र के ब्रह्मोत्रा गांव निवासी रौशन यादव, पिता रामदयाल यादव के रूप में हुई है. घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है. मौत के कारणों का पता लगाने के लिए एफएसएल की टीम ने घटनास्थल के साथ सदर अस्पताल पहुंचकर आवश्यक साक्ष्य जुटाए.
पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल टीम गठित
मौत की परिस्थितियों की जांच के साथ प्रशासन की ओर से पोस्टमार्टम प्रक्रिया की निगरानी के लिए वरीय उपसमाहर्ता बिरजू दास को मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया. उनकी निगरानी में मेडिकल टीम ने मृतक के शव का पोस्टमार्टम किया.
पोस्टमार्टम करने वाली मेडिकल टीम में डॉ. रवि प्रकाश, डॉ. विकास कुमार और डॉ. अभिषेक कुमार झा शामिल थे. प्रशासन के अनुसार, पोस्टमार्टम और एफएसएल जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा.
परिवार के साथ ननिहाल में रहता था रौशन
जानकारी के अनुसार, रौशन यादव अरेर थाना क्षेत्र के ब्रह्मोत्रा गांव का रहने वाला था. वह अपने ननिहाल गांव बलाट, थाना रहिका में लंबे समय से परिवार के साथ रह रहा था.
मंडल कारा में उसकी मौत के बाद जेल प्रशासन और पुलिस द्वारा घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की पड़ताल शुरू कर दी गयी है.
परिजनों ने जेल प्रशासन पर लगाया हत्या का आरोप
सदर अस्पताल में मृतक की बहन ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने बताया कि करीब दो महीने पहले उनके भाई को रहिका थाना पुलिस ने आर्म्स एक्ट के झूठे मुकदमे में गिरफ्तार किया था.
बहन के अनुसार, वह शनिवार को मंडल कारा रामपट्टी में भाई से मिलने गयी थीं. उस समय रौशन पूरी तरह स्वस्थ था. इसके बाद सोमवार की रात जेल से फोन कर उसके भाई की मौत की सूचना दी गयी.
परिजन का आरोप है कि रौशन के शरीर पर चोट के निशान और गले में रस्सी के निशान दिखाई दे रहे थे. उन्होंने जेल में बंद अपराधियों और जेल कर्मियों पर हत्या का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
एफएसएल रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा मौत का कारण
घटना के बाद एफएसएल टीम ने घटनास्थल और सदर अस्पताल पहुंचकर जांच की तथा आवश्यक साक्ष्य जुटाए. पुलिस और जेल प्रशासन घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं.
जेल अधीक्षक ओम प्रकाश शांति भूषण ने कहा कि जिला प्रशासन की ओर से उन्हें इस मामले में बयान देने से मना किया गया है. वहीं, बंदी की मौत की सूचना के बाद सदर अस्पताल में बड़ी संख्या में परिजन और अन्य लोग जुट गये. सुरक्षा के मद्देनजर नगर थाना की पुलिस भी अस्पताल में तैनात रही.
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