Madhubani News: लोकहित रंग पीठ सेवा संस्थान के तत्वावधान में राजनगर में आयोजित 30 दिवसीय प्रस्तुतिपरक हिंदी नाट्य कार्यशाला के समापन समारोह में साहित्य अकादमी नई दिल्ली से सम्मानित साहित्यकार अजित आजाद ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज का दर्पण, मानवीय संवेदनाओं का प्रकटीकरण और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का सशक्त माध्यम है.
नाटक सामाजिक बदलाव का प्रभावी माध्यम
समारोह में अजित आजाद ने कहा कि नाटक सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करने, ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित रखने और मानवीय मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उन्होंने कहा कि रंगमंच से लोगों में सहानुभूति, संवाद कौशल, आलोचनात्मक सोच और टीम भावना विकसित होती है तथा यह जीवन की जटिलताओं को कलात्मक ढंग से समझने का अवसर देता है.
वरिष्ठ रंगकर्मी, नाटककार एवं फिल्म निर्देशक श्याम भास्कर ने कहा कि प्राचीन काल से ही नाट्य कला को दृश्य काव्य की सर्वोच्च विधा माना गया है. आज के युवा कलाकार उसी समृद्ध परंपरा को आधुनिक संदर्भों में आगे बढ़ा रहे हैं.
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स्वागत गीत के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत शिवालय संगीत महाविद्यालय, राजनगर की छात्राओं द्वारा स्वागत गीत से हुई. इसके बाद कार्यशाला के प्रतिभागियों ने कार्यशाला निदेशक प्रो. महेन्द्र लाल कर्ण द्वारा लिखित नाटक 'मौन' का मंचन किया. नाटक का निर्देशन अरविंद कुमार गुप्ता ने किया.
प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित
समारोह में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) मधुबनी के राष्ट्रीय सचिव इंद्रभूषण रमन बमबम, लोककला मर्मज्ञ जटाधर पासवान सहित अन्य अतिथियों ने प्रतिभागियों को मोमेंटो और प्रमाण पत्र प्रदान किए.
विशेष रूप से प्रभाती कमलिनी को 50 मिनट की एकल अभिनय प्रस्तुति के लिए पाग, दोपट्टा और मोमेंटो देकर संस्था के सचिव प्रो. महेन्द्र लाल कर्ण ने सम्मानित किया.
कार्यक्रम का संचालन संस्कृतिकर्मी प्रमोद सर्राफ और सुमित कुमार ने किया.
