Madhubani News: राज्य सरकार ने गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के लिए विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाने का निर्णय लिया है. अभियान के तहत 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर, सीओपीडी, एनीमिया और सिफिलिस की जांच की जाएगी. इस संबंध में कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पाण्डेय ने जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.
सभी स्वास्थ्य संस्थानों में होगी स्क्रीनिंग
यह अभियान आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर), अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल और जिला अस्पतालों में चलाया जाएगा.
सभी जिला अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों, रेफरल अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी में इलाज के लिए आने वाले पात्र मरीजों की अनिवार्य रूप से स्क्रीनिंग की जाएगी. आवश्यकता पड़ने पर मरीजों की जांच कर उन्हें दवा और उपचार भी उपलब्ध कराया जाएगा.
दवा, जांच किट और उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने अभियान शुरू होने से पहले सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक दवाएं, जांच किट, रिएजेंट्स, कंज्यूमेबल्स और अन्य उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. बीएमएसआईसीएल को मांग के अनुरूप दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है. जिलों को विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर राज्य स्वास्थ्य समिति को भेजने का भी निर्देश दिया गया है.
आशा, एएनएम और सीएचओ की होगी अहम भूमिका
अभियान की सफलता के लिए आशा कार्यकर्ता, एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (सीएचओ) को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पात्र लोगों को जांच के लिए प्रेरित करेंगी. वहीं सीएचओ आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में आने वाले लाभार्थियों की स्क्रीनिंग कर उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मरीजों का फॉलो-अप करेंगे तथा एनपी-एनसीडी पोर्टल पर उनकी प्रविष्टि सुनिश्चित करेंगे.
प्रखंड और जिला स्तर पर होगी प्रतिदिन निगरानी
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक और प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक को अभियान की दैनिक निगरानी, लक्ष्य प्राप्ति और दवा व जांच सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है.
जिला स्तर पर जिला योजना समन्वयक, जिला गैर-संचारी रोग पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक और जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी को समन्वय, मानव संसाधन प्रबंधन, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और राज्य स्तर पर प्रतिदिन रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
