मधुबनी: बिहार सरकार राज्य के ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने जा रही है. इसके तहत जिले के सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (APHC) और स्वास्थ्य उप-केंद्रों का भौतिक आकलन कराया जाएगा. राज्य स्वास्थ्य समिति के संयुक्त सचिव-सह-प्रभारी आधारभूत संरचना प्रिय रंजन राजू ने इस संबंध में जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं.
भवन से बिजली-पानी तक सुविधाओं का होगा आकलन
जारी निर्देश के अनुसार, जिले में संचालित सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य उप-केंद्रों की जमीनी स्थिति का आकलन किया जाएगा. इसके लिए अधिकारियों को केंद्रों के भवन की स्थिति, बिजली, पानी, दवाइयों और उपकरणों समेत उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की जांच करने का निर्देश दिया गया है.
इस सर्वे का उद्देश्य यह पता लगाना है कि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर बनाने के लिए किन स्तरों पर काम की आवश्यकता है. आकलन के दौरान भवनों की स्थिति के साथ मरीजों को उपलब्ध करायी जा रही बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की भी जानकारी जुटायी जाएगी.
सिविल सर्जन और डीपीएम को मिली जिम्मेदारी
इस कार्य को निर्धारित समय सीमा में पूरा कराने की जिम्मेदारी सिविल सर्जन और जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) को संयुक्त रूप से दी गयी है. जिले के सभी संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों का डेटा निर्धारित प्रपत्र में तैयार करने का निर्देश दिया गया है.
राज्य मुख्यालय ने इस कार्य को अति आवश्यक श्रेणी में रखा है. मधुबनी जिला स्वास्थ्य समिति को पूरे जिले के स्वास्थ्य केंद्रों की आकलन रिपोर्ट 5 सितंबर तक राज्य स्वास्थ्य समिति को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
रिपोर्ट के आधार पर तैयार होगी जीर्णोद्धार की योजना
स्वास्थ्य केंद्रों के भौतिक आकलन के बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के जीर्णोद्धार तथा सुविधाओं के विस्तार के लिए आगे की योजना तैयार की जाएगी.
रिपोर्ट में सामने आने वाली कमियों के आधार पर आवश्यक बजट और कार्ययोजना तैयार किए जाने की उम्मीद है. इससे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.
ब्लॉक स्तर पर गठित की गयीं टीमें
सिविल सर्जन हरेंद्र कुमार ने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति से मिले निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है. सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य उप-केंद्रों के भौतिक आकलन के लिए ब्लॉक स्तर पर टीमों का गठन कर दिया गया है.
उन्होंने बताया कि टीमों का मुख्य फोकस भवनों की जर्जर स्थिति की पहचान, पानी और बिजली की उपलब्धता तथा मरीजों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की जांच पर है. निर्धारित समय सीमा 5 सितंबर तक पूरी रिपोर्ट तैयार कर राज्य मुख्यालय को भेज दी जाएगी, ताकि जल्द से जल्द आवश्यक जीर्णोद्धार कार्य शुरू कराया जा सके.
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