Madhubani News: झंझारपुर नगर परिषद के वार्ड संख्या-20 स्थित बाढ़ आपदा केंद्र भवन के जीर्णोद्धार कार्य को लेकर सवाल उठने लगे हैं. समाजसेवी ने आरोप लगाया है कि जर्जर और क्षतिग्रस्त पिलरों को हटाए बिना ही उन पर नया निर्माण कराया जा रहा है, जिससे भविष्य में भवन की सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है.
37 लाख रुपये की योजना पर उठे सवाल
बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से नगर परिषद झंझारपुर के वार्ड-20 स्थित कचहरी सह अर्द्धनिर्मित आपदा भवन का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है. शिलान्यास बोर्ड के अनुसार इस योजना की प्राक्कलित लागत 37,49,330 रुपये है, जबकि एकरारनामा राशि 31,07,820 रुपये निर्धारित की गई है. यह कार्य वित्तीय वर्ष 2025-26 में कराया जा रहा है.
समाजसेवी ने लगाया जर्जर पिलरों पर निर्माण का आरोप
समाजसेवी अमित मिश्रा ने आरोप लगाया है कि आपदा केंद्र भवन पहले से ही जर्जर है और इसके कई पिलरों में दरारें हैं. इसके बावजूद निर्माण एजेंसी पुराने पिलरों को ध्वस्त किए बिना उन्हीं पर नए पिलर ढाल रही है. उनका कहना है कि क्षतिग्रस्त पिलरों पर अतिरिक्त भार डालने से भवन और कमजोर हो सकता है तथा बरसात या बाढ़ के दौरान हादसे की आशंका बढ़ सकती है.
उन्होंने प्रशासन से निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की तकनीकी जांच कराने की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जर्जर भवन को हटाकर नए सिरे से निर्माण नहीं कराया गया तो जनप्रतिनिधियों के साथ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
नगर परिषद और जेई ने कही जांच की बात
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मनोज कुमार ने कहा कि जीर्णोद्धार कार्य के दौरान क्षतिग्रस्त पिलरों को ध्वस्त कर नए सिरे से निर्माण किया जाना है. उन्होंने बताया कि मामले में जूनियर इंजीनियर (जेई) को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं.
वहीं, जेई राहुल सदा ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
