Madhubani News : दवा की कीमतें बढ़ने से गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार परेशान

दवा खरीदना लोगों की मजबूरी है. इसकी कीमतें बढ़ने से मध्यम व गरीब वर्ग के लोग काफी परेशान हैं.

मधुबनी.

सरकार की ओर से मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने की तमाम कोशिशों के बाद भी इसकी कीमतें लगातार बढ़ रही है. इस कारण इलाज का खर्च बढ़ गया है. बावजूद इसके दवा खरीदना लोगों की मजबूरी है. इसकी कीमतें बढ़ने से मध्यम व गरीब वर्ग के लोग काफी परेशान हैं.

सूत्रों की माने तो पिछले एक वर्ष में दवा की कीमत में लगभग 35 से 40 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. कोरोना काल में न केवल इम्युनिटी बढ़ाने वाली दवाओं का एक बड़ा बाजार तैयार होने के साथ कई दूसरी जरूरी दवाओं की कीमतें भी तेजी से बढ़ी है. कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ने के बाद चिकित्सकों ने भी लोगों से शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने की सलाह दी. इसके बाद दवा बाजार में बाढ़ सी आ गयी. कंपनियों ने इस अवसर का फायदा भी उठाया. एंटीबायोटिक, मल्टी विटामिन, जिंक आयरन और कैल्शियम की गोलियों की मांग इस कदर बढ़ गयी कि इसकी आड़ में दवाओं की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई, जो आज तक कायम है. सरकार की ओर से जनहित में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का काउंटर खोला गया, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में आमलोगों के पहुंच से जन औषधि केंद्र बाहर है. मधुबनी केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के सचिव दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा है कि दवाओं की कीमतों में वृद्धि हुई है. उन्होंने कहा कि चाइना व अन्य देशों से आने वाले रॉ मैटेरियल की आपूर्ति कम होना कीमतों में वृद्धि का एक मुख्य कारण है. हालांकि कोरोना वायरस के समय से लोग अपने हेल्थ के प्रति सजग हो गए हैं. खानपान के साथ संतुलित आहार सप्लीमेंट पर विशेष ध्यान दे रहे हैं.

जांच की कीमतों में भी हुई बढ़ोतरी

कार्डियेक, डायबिटीज, हायपर टेंशन की दवाओं के साथ ही सभी प्रकार की दवा की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है. वहीं अल्ट्रासाउंड, एंजियोग्राफी, सिटी स्कैन सहित पैथलैब जांच में भी 30 से 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. पिछले 1 साल में महंगाई का ग्राफ तेजी से भाग रही है. एंटीबायोटिक दवाओं की कीमतें भी 25 से 30 फीसदी बढ़ा दी गई है. पिछले एक साल में मंहगाई का ग्राफ तेजी से बढ़ी है. कंपनियों ने सभी तरह की दवाओं में 30 से 35 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. सर्दी, खांसी, बुखार से लेकर एनर्जी पर नियंत्रण वाली दवाओं की कीमतें भी 25 से 30 प्रतिशत बढ़ा दी है. गले में इन्फेक्शन दूर करने वाली जो टेबलेट पहले 50 रुपए मिलती थी, उसकी कीमत अब 80 रुपए हो गई है. इसी प्रकार पेट संबंधी गड़बड़ी दूर करने वाली सिरप जो पहले 95 रुपया मिलता था, अब इसकी कीमत 115 रुपए हो गई है. मल्टी विटामिंस के प्रति पैकेट पर 20 से 25 रुपए की बढ़ोतरी कर दी गयी है. बीएन झा कॉलोनी निवासी गणेश कुमार झा, सुशील झा, अशोक कुमार सहित कई अन्य लोगों ने कहा कि कई साल से ब्लड प्रेशर, गैस एवं डायबिटीज की दवा ले रहा हूं. गैस की जो दवाएं पहले 100 रुपये में मिलते थे, वह अब 150 रुपये में मिलते हैं. वहीं, डायबिटीज की जो दवाएं 130 रुपये में मिलते थे, वह अब 166 रुपये में मिल रहे हैं. मधुबनी केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला सचिव दीपक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि दवाओं की बढ़ रही कीमत से इनकार किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि लोग अब ऑनलाइन दवाओं की खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन इसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न चिह्न लग रहा है. सरकार इसके लिए कोई पहल नहीं कर रही है. सूत्रों की माने तो दवा दुकानों में आजकल इथिकल दवा के नाम पर जेनेरिक दवा मरीजों को प्रिंट रेट से कम कीमत पर बेची जा रही है. एक ग्राहक ने बताया कि गैस की एक दवा पर कीमत 150 रुपये अंकित था. दुकानदार ने वह गैस की दवा महज 100 रुपये में दिया. इससे साफ जाहिर है, कि वह जेनेरिक दवा ही होगा, जबकि जन औषधि केंद्र में यह दवा महज 30 रुपये में मिलता है. ग्राहक ने बताया कि अब पता ही नहीं चल पाता है कि मरीज जेनेरिक दवा का सेवन कर रहा है या एथिकल.

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By Prabhat Khabar News Desk

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