कोल्ड वेव का बच्चों व बुजुर्गों पर पड़ता है नकारात्कम प्रभाव

बीते एक पखवाड़े से अधिक समय से जिला में कोल्ड वेब की स्थिति बनी हुई है.

मधुबनी. बीते एक पखवाड़े से अधिक समय से जिला में कोल्ड वेब की स्थिति बनी हुई है. कोल्ड वेव से निपटने एवं आमजन को इसके दुष्प्रभाव से बचाव के लिए ईडी अमित कुमार पाण्डेय ने डीएम तथा सिविल सर्जन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है. ईडी द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि शीतलहर का नाकारात्मक प्रभाव बुजुर्गों, बच्चों, दिव्यांगजनों, बेघर व्यक्तियों, दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित रोगियों एवं खुले क्षेत्र में व्यवसाय करने वाले छोटे व्यवसायियों पर सबसे अधिक पड़ता है. वहीं सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि ईडी के निर्देश पर जिला पदाधिकारी द्वारा सैकड़ों लोगों को कंबल वितरण किया गया है. जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी अस्पतालों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया गया है. मरीजों को भर्ती वार्ड में कंबल, हीटर एवं दवा की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. सदर अस्पताल से लेकर पीएचसी तक इमरजेंसी सेवा को 24 घंटे बहाल करने का निर्देश दिया गया है. ताकि अस्पताल में आने वाले मरीजों को तत्काल बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराया जा सके.

कोल्ड वेव से बचाव के लिए इसका करें अनुपालन

ईडी के निर्देश में कहा गया है, कि कोल्ड वेब का प्रमुख लक्षण तेज कंपकंपी, सांस लेने में तकलीफ, बहुत थकान या सुस्ती एवं हाथ पैर की उंगलियों का सून्न होना है. मौसम संबंधी जानकारी प्राप्त कर आपातकालीन निर्देशों का अनुपालन करने का निर्देश दिया है. शरीर को गर्म रखने के लिए एक की वजाय कई परत बाले कपड़े पहने. सिर, गर्दन एवं एवं कानों को ढककर रखें. गर्म पानी, सूप, अदरक बाली चाय, पौष्टिक भोजन एवं विटामिन सी युक्त फल एवं सब्जियों का सेवन करें. शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें. आयल, पेट्रोलियम जेली एवं बॉडी क्रीम के उपयोग से अपनी त्वचा को नय रखें. सुबह की सैर से बचें. कोल्ड वेब से लंबे समय तक संपर्क में आने से उंगलियों या त्वचा सून्न अथवा नीली एवं काली पड़ सकती है. इससे पीड़ित व्यक्ति हाइपोथर्मिया का शिकार हो सकता है. इस परिस्थिति में तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए. सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कोल्ड वेब से संबंधित दवाओं एवं लाजिस्टिक्स की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश सिविल सर्जन को दिया है. समुदाय में कोल्ड वेब से बचाव जैसे हाइपोथर्मिया के मरीजों को बिना होश में आये किसी भी तरल पदार्थ नहीं देना, लकड़ी मोमबत्ती, हीटर को बंद कमरे में नहीं जलाने की सलाह चिकित्सकों द्वारा दिया जा सकता है. सिविल सर्जन डॉक्टर हरेंद्र कुमार ने कहा कि ईडी के निर्देश का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश सभी संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, एवं उपाधीक्षक को दिया गया है.

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Published by: Ranjeet thakur

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