Madhubani News: नगर क्षेत्र के बरैयाटोल में पंडित कुंजबिहारी मिश्र के आवास पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ से पूरा इलाका भक्तिरस में सराबोर हो गया है. आचार्य कुंजबिहारी मिश्र द्वारा किए जा रहे प्रवचन से पूरे गांव में आध्यात्मिक और उत्सव का माहौल कायम है. प्रतिदिन शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक चलने वाली इस संगीतमय कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का श्रवण करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है.
धार्मिक आयोजन: त्वरित जानकारी सारणी (Quick Info Table)
| आयोजन के मुख्य बिंदु | कार्यक्रम और कथा का विवरण |
|---|---|
| धार्मिक अनुष्ठान | सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महायज्ञ |
| मुख्य स्थल | पंडित कुंजबिहारी मिश्र का आवास, बरैयाटोल, मधुबनी |
| कथावाचक / आचार्य | पंडित कुंजबिहारी मिश्र |
| दैनिक समय | प्रतिदिन शाम 06:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक |
| कथा का समापन | रविवार (31 मई 2026) |
देवराज इंद्र का मान-मर्दन और गोवर्द्धन पूजा का जीवंत वर्णन
कथा के विशेष प्रसंग में कथावाचक पंडित कुंजबिहारी मिश्र ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल्य रूप और गोवर्द्धन पूजा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि जब नंदगांव में बाबा नंद और अन्य ब्रजवासी देवराज इंद्र की पारंपरिक पूजा की तैयारी कर रहे थे, तब बाल कृष्ण ने उन्हें रोका. कन्हैया के समझाने पर सभी लोगों ने इंद्र के बजाय गोवर्द्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी.
इससे क्रोधित होकर देवराज इंद्र ने ब्रजमंडल पर भयंकर आंधी और मूसलाधार बारिश शुरू कर दी. ब्रजवासियों को संकट में देख भगवान कृष्ण ने अपनी एक छोटी उंगली पर विशाल गोवर्द्धन पर्वत को उठा लिया और उसके नीचे सभी नंदवासियों को सुरक्षित आश्रय दिया. अंततः इंद्र का अभिमान चूर हुआ और उन्होंने भगवान से क्षमा मांगी.
बकासुर वध से लेकर कालिया नाग मर्दन तक की कथा
कथा प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए आचार्य ने श्रीकृष्ण की कई अन्य आलौकिक लीलाओं का भव्य चित्रण किया:
- बाल लीलाएं: माता यशोदा द्वारा बाल्य रूप में कान्हा को बांधने की चेष्टा और प्रभु की कृपा का वर्णन.
- असुरों का संहार: कंस द्वारा भेजे गए भयंकर असुर बकासुर की हत्या का प्रसंग सुनाया गया.
- ब्रह्मा जी का संशय: भगवान ब्रह्मा के मन में श्रीकृष्ण के पूर्ण ब्रह्म होने को लेकर उपजे संशय और उसके निवारण की कथा प्रस्तुत की गई.
- कालिया नाग मर्दन: यमुना नदी के कालीदह में कालिया नाग के विष से ब्रज को मुक्त कराने और उसके फन पर भगवान के नृत्य की कथा सुन श्रद्धालु निहाल हो गए.
वृंदावन जाने वाले भक्तों के लिए गोवर्द्धन परिक्रमा अनिवार्य
पंडित कुंजबिहारी मिश्र का धार्मिक संदेश: “गोवर्द्धन भगवान की महिमा अनंत और अत्यंत फलदायी है. जो कोई भी सनातनी श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन की अभिलाषा लेकर पवित्र भूमि वृंदावन जाता है, उसे गोवर्द्धन पर्वत की परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए. इसके बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है.”
कथा के बीच-बीच में प्रस्तुत किए गए भजनों और भव्य गीत-संगीत से पूरा वातावरण रमणीय और आनंदमयी बना रहा. प्रत्येक दिन की कथा के अंत में श्रीमद्भागवत भगवान की भव्य आरती उतारी जाती है और श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाता है. इस अलौकिक धार्मिक अनुष्ठान का भव्य समापन रविवार को पूर्णाहूति के साथ किया जाएगा.
