भारत-नेपाल सीमा पर गुजरात के 17 वर्षीय किशोरी का सुरक्षित हस्तांतरण, एसएसबी और नेपाल पुलिस ने निभाई अहम भूमिका

भारत-नेपाल सीमा पर 48वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने नेपाल पुलिस के साथ मिलकर 17 वर्षीय भारतीय किशोरी को सकुशल उसके परिवार तक पहुंचाया. यह घटना मानवीय दायित्वों और द्विपक्षीय समन्वय का एक बेहतरीन उदाहरण है.

India Nepal Border: भारत-नेपाल सीमा पर मानवीय दायित्वों के निर्वहन और द्विपक्षीय समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए 48वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) जयनगर ने नेपाल पुलिस और नेपाल एपीएफ के सहयोग से 17 वर्षीय भारतीय किशोरी को सकुशल उसके परिजनों और गुजरात पुलिस के हवाले किया.

नेपाल के धनुषा जिले में थी किशोरी

जानकारी के अनुसार, गुजरात के राजकोट की रहने वाली 17 वर्षीय भारतीय किशोरी एक नेपाली नागरिक के साथ घर से चली गई थी. बाद में वह नेपाल के धनुषा जिला स्थित सबैला पुलिस थाना की अभिरक्षा में थी.

गुजरात पुलिस की टीम पहुंची जयनगर सीमा

किशोरी की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए गुजरात पुलिस, राजकोट की चार सदस्यीय टीम, जिसमें दो पुरुष और दो महिला पुलिसकर्मी शामिल थे, उप निरीक्षक ए.बी. चावड़ा के नेतृत्व में भारत-नेपाल सीमा स्थित बलडीहा पहुंची.

एसएसबी ने कराया सुरक्षित हस्तांतरण

48वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल ने नेपाल प्रहरी और नेपाल एपीएफ के साथ आवश्यक समन्वय स्थापित किया. इसके बाद एफ समवाय, कमला के कार्यक्षेत्र में बीसीपी बलडीहा (इनरवा कैंप) के समीप भारत-नेपाल सीमा पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत किशोरी का सुरक्षित हस्तांतरण कराया गया.

कई अधिकारी और किशोरी के पिता रहे मौजूद

हस्तांतरण के दौरान नेपाल एपीएफ के प्रभारी इंस्पेक्टर नारायण उप्रेती, नेपाल प्रहरी, सशस्त्र सीमा बल के सहायक कमांडेंट हिमांशु मोहंती, गुजरात पुलिस की टीम तथा किशोरी के पिता विपुल गिरी उपस्थित रहे. नेपाल प्रहरी ने सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद किशोरी को उसके पिता और गुजरात पुलिस टीम को विधिवत सुपुर्द कर दिया.

राजकोट के लिए रवाना हुई पुलिस टीम

सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद गुजरात पुलिस की टीम किशोरी और उसके पिता के साथ सुरक्षित रूप से राजकोट के लिए रवाना हो गई.

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लेखक के बारे में

By रमण कुमार मिश्रा

22 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. पॉजीटिव स्टोरी, चुनाव, बाढ़ और क्राइम सहित हर विधा की खबर लेखनी में निपुण हैं. जमीनी मुद्दों पर अपनी गहरी पकड़ के लिए जाने जाते हैं, जिसके तहत उनकी "वर्दीबास रेल खंड" एवं "गढ़गांव का दर्द" जैसी गंभीर सीरीज कई दिनों तक प्रमुखता से प्रकाशित हो चुकी हैं.

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