आवास योजना के लाभार्थी को मनरेगा मजदूरी नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत घर बना रहे लाभार्थियों को मनरेगा से मिलने वाली मजदूरी अब तक नहीं मिल पाने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

By RANJEET THAKUR | January 8, 2026 6:20 PM

मधुबनी. प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत घर बना रहे लाभार्थियों को मनरेगा से मिलने वाली मजदूरी अब तक नहीं मिल पाने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. योजना के अनुसार आवास निर्माण में लगे लाभार्थियों को मनरेगा के तहत 90 दिन की मजदूरी का भुगतान किया जाना है. ताकि गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ न पड़े. लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है. कई पंचायतों में मस्टर रोल समय पर अपलोड नहीं होने, जॉब कार्ड सत्यापन में देरी और बैंक खाते से जुड़ी तकनीकी खामियों के कारण मजदूरी अटकी हुई है. इसका असर यह हुआ है कि लाभार्थी अपनी जेब से खर्च कर घर का निर्माण कर रहे हैं या फिर काम अधूरा छोड़ने को मजबूर हैं. लाभार्थियों का कहना है कि यदि समय पर मनरेगा मजदूरी मिल जाए तो आवास निर्माण तेजी से पूरा हो सकता है. विदित हो कि आवास योजना और मनरेगा का उद्देश्य गरीबों को सशक्त बनाना है, ऐसे में मजदूरी भुगतान में हो रही देरी इस उद्देश्य पर सवाल खड़े करती है.

मनरेगा मजदूरी भुगतान में बड़ा अंतर, सिर्फ 6 हजार 768 लाभार्थियों को ही मिला हक

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर निर्माण में लगे मनरेगा मजदूरों के लिए स्थिति अभी भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है. ताजा आंकड़ों के अनुसार जिले में 30 हजार 841 गरीबों को पीएम आवास योजना ग्रामीण का लाभ दिया गया है. इनमें से केवल 6 हजार 768 लाभार्थियों को ही मनरेगा मजदूरी का भुगतान किया जा सका है. जबकि बड़ी संख्या में पात्र लाभार्थी अब भी मजदूरी मिलने का इंतजार कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार पीएम आवास योजना के अंतर्गत कई लाभार्थियों ने मनरेगा से निर्धारित मजदूरी के सहारे अपने घर का निर्माण शुरू किया. लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पूरा असर अभी दिखाई नहीं दे रहा है. सिर्फ छह हजार 768 लाभार्थियों को मजदूरी मिलने से यह स्पष्ट है कि बड़ी आबादी अब भी आर्थिक दबाव में है. मजदूरी नहीं मिलने के कारण कई जगहों पर आवास निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ है.

मनरेगा मजदूरों को सशक्त बनाने की है ठोस पहल

ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों और श्रमिक परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से सरकार ने मनरेगा मजदूरों को सशक्त बनाने की योजना पर विशेष जोर दिया है. इस योजना के तहत मजदूरों को सिर्फ रोजगार ही नहीं, बल्कि स्थायी आवास, समय पर मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा का लाभ भी दिया जाना है. मधुबनी जिले में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है, जहां करीब 30 हजार 841 मनरेगा मजदूरों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है. इससे इन परिवारों को कच्चे घरों से मुक्ति मिली और सम्मानजनक जीवन की ओर कदम बढ़ा. हालांकि मजदूरी भुगतान को लेकर चुनौतियां भी सामने आई हैं, कारण अब तक सिर्फ छह हजार लाभार्थियों को ही मनरेगा मजदूरी का भुगतान हो सका है. सरकार का मानना है कि यदि मनरेगा और पीएम आवास जैसी योजना से ग्रामीण मजदूरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और पलायन में भी कमी आएगी. सरकार की यह पहल न सिर्फ रोजगार, बल्कि सम्मान और सुरक्षा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

आवास निर्माण में सहारा बनती है मनरेगा मजदूरी

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जब किसी लाभार्थी के घर का निर्माण होता है, तो उसे केवल आवास की स्वीकृत राशि ही नहीं मिलती. बल्कि मनरेगा के माध्यम से मजदूरी का लाभ भी दिया जाता है. इसका उद्देश्य यह है कि गरीब परिवार बिना कर्ज लिए सम्मानजनक और पक्का घर बना सकें. योजना के प्रावधानों के अनुसार आवास निर्माण के दौरान नींव, दीवार, छत जैसे कार्यों में लगे श्रम को मनरेगा से जोड़ा जाता है. इससे लाभार्थी को तय कार्य-दिवस के बदले मजदूरी मिलती है, जो सीधे उसके बैंक खाते में भेजी जाती है. यह मजदूरी आवास निर्माण की गति बढ़ाने के साथ-साथ परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को भी पूरा करने में मदद करती है. ग्रामीण क्षेत्रों में यह व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण है, कारण इससे एक ही समय पर रोजगार और आवास दोनों का लाभ मिलता है.उप विकास आयुक्त सुमन प्रसाद साह ने कहा कि लंबित मामलों की जांच कर शीघ्र ही मजदूरी का भुगतान किया जाएगा और योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय किया जाएगा. शेष लाभार्थियों के भुगतान के लिए रिकॉर्ड दुरुस्त किए जा रहे हैं. शीघ्र ही सभी पात्र लोगों को उनका बकाया मिलेगा.

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