पंचायतों में वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट के निर्माण से कूड़ा मुक्त बन रहा गांव
स्वच्छ और स्वस्थ गांव की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में जिले की 382 पंचायतों में वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट का निर्माण कराया जा रहा है.
मधुबनी. स्वच्छ और स्वस्थ गांव की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में जिले की 382 पंचायतों में वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट का निर्माण कराया जा रहा है. यह पहल न केवल गांवों को साफ-सुथरा बनाएगी, बल्कि ठोस कचरा प्रबंधन को एक नई दिशा भी देगी. अब कचरा गांव की गलियों और खेतों में नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस होकर उपयोगी संसाधन में बदलेगा. इस योजना के तहत घर-घर से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को अलग किया जा रहा है. गीले कचरे से खाद तैयार की जा रही है. जिसका उपयोग किसान अपने खेतों में कर सकेंगे. वहीं सूखे कचरे का पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा. इससे न सिर्फ गांवों की सफाई व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि पंचायतों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा.
333 वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट बनकर तैयार, स्वच्छ गांव अभियान को मिली रफ्तार
ग्रामीण स्वच्छता को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है. जिले में 333 वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट बनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी हैं, जिससे गांवों की साफ-सफाई व्यवस्था को नई गति मिल रही है. वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट के माध्यम से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग प्रोसेस किया जा रहा है. जिससे पर्यावरण प्रदूषण में कमी आ रही है. यूनिट के शुरू होने से गांवों की गलियां साफ हो रही हैं, बदबू और गंदगी से राहत मिली है तथा स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी घटे हैं.स्थानीय स्तर पर रोजगार का हो रहा सृजन
वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे. स्वयं सहायता समूह, स्वच्छता कर्मी और पंचायत प्रतिनिधि मिलकर इस व्यवस्था को सफल बना रहे हैं. महिलाओं की भागीदारी से यह अभियान और अधिक प्रभावी हो रहा है. पंचायत स्तर पर चल रही यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों को जमीन पर उतारने का उदाहरण है. स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर पंचायत-तीनों का संगम इस योजना में देखने को मिल रहा है. आने वाले समय में ये 382 पंचायतें प्रेरणा मॉडल बनेंगी. और “स्वच्छ गांव, स्वस्थ समाज” का सपना साकार होगा.319 पंचायतों में गीला-सूखा कचरा अलग, स्वच्छता की दिशा में मजबूत पहल
गांवों को स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में जिले की 319 पंचायतों में गीला और सूखा कचरा अलग-अलग किया जा रहा है. इससे गांवों की गलियां साफ हो रही हैं और बीमारियों का खतरा भी कम हो रहा है. घर-घर से निकलने वाले कचरे को दो हिस्सों में बांटा जा रहा है. गीले कचरे से जैविक खाद तैयार की जा रही है, जिससे खेतों की उर्वरता बढ़ेगी और किसानों को लाभ मिलेगा. वहीं सूखे कचरे को छांटकर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा रहा है, जिससे प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगेगी. ग्रामीणों को भी कचरा अलग-अलग रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है.कचरे की प्रोसेसिंग से गांव की बदल रही सूरत
कभी गांव की गलियों में बिखरा रहने वाला कचरा आज व्यवस्थित प्रोसेसिंग के जरिए गांव की तस्वीर बदल रहा है. घर-घर से कचरे का संग्रह, गीले और सूखे कचरे को अलग करने और फिर उसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान- पूरी प्रक्रिया ने ग्रामीण स्वच्छता को नई पहचान मिल रही है. इस व्यवस्था का असर गांव की गलियों में साफ दिख रहा है. पहले जहां बदबू और गंदगी आम बात थी, आज वहां स्वच्छ सड़कें और साफ वातावरण नजर आता है. बीमारियों का खतरा घटा है और लोग स्वच्छता के प्रति पहले से अधिक जागरूक हुए हैं. उप विकास आयुक्त सुमन प्रसाद साह ने कहा कि मधुबनी में 333 वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट का तैयार होना इस बात का प्रमाण है कि सही योजना और जनभागीदारी से गांवों की सूरत बदल रही है. यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है. बचे पंचायतों में वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट का निर्माण शीघ्र पूरा कराया जाएगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
