मधुबनी न्यूज: झंझारपुर अधिवक्ता संघ का चुनावी विवाद सोमवार को और गहरा गया. बिहार बार काउंसिल के निर्देश के बाद भी पुरानी निर्वाचन प्रक्रिया के तहत 17 पदों पर निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा कर प्रमाण पत्र बांट दिए गए. वहीं, दूसरे गुट ने बार काउंसिल की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में नयी चुनाव समिति गठित कर चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी. इससे एक ही चुनाव को लेकर संघ में दो समानांतर प्रक्रियाएं सामने आ गयी हैं.
17 प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचन का प्रमाण पत्र
नाम वापसी के बाद 19 पदों के लिए 17 प्रत्याशी ही मैदान में बचे थे. पुरानी प्रक्रिया के निर्वाची पदाधिकारी कुमार जितेंद्र ने सोमवार शाम सभी 17 प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर प्रमाण पत्र सौंप दिया. जबकि मतदान 13 अगस्त को होना निर्धारित था और इसी दिन परिणाम आने की संभावना थी.
निर्विरोध निर्वाचित होने वालों में अध्यक्ष पद पर विजय प्रसाद, महासचिव पद पर जितेंद्र कुमार झा और कोषाध्यक्ष पद पर हरि प्रसाद शामिल हैं. उपाध्यक्ष के तीन पदों पर राघवेंद्र यादव, सुमन कुमार झा और प्रदीप कुमार चुने गये. संयुक्त सचिव के तीन पदों पर ओमप्रकाश पोद्दार, बेचन राय और प्रभु नारायण पासवान को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया.
कार्यकारिणी के छह सदस्यों को भी मिला प्रमाण पत्र
सह सचिव के दो पदों पर उदय शंकर तिवारी और कमलेश कुमार यादव को निर्विरोध चुना गया. वहीं कार्यकारिणी सदस्य के छह पदों पर सत्यनारायण प्रसाद, विशो कुमार राय, जयकृष्ण यादव, विजय कुमार, आशुतोष कुमार और शंभू कुमार को प्रमाण पत्र दिया गया.
पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में बनी नयी चुनाव समिति
दूसरी ओर, बिहार बार काउंसिल के निर्देश पर नियुक्त पर्यवेक्षक सुशील कुमार चौधरी और अनवरुल हक अंसारी की मौजूदगी में बैठक हुई. इसमें नयी चुनाव समिति का गठन किया गया. जगन्नाथ प्रसाद कुशवाहा को चुनाव आयुक्त बनाया गया, जबकि बलराम साहू, राजलाल यादव और शंभूनाथ झा को तीन सदस्यीय चुनाव समिति में शामिल किया गया.
अब बार काउंसिल के फैसले पर टिकी निगाहें
नयी चुनाव समिति ने बिहार बार काउंसिल के निर्देश के अनुरूप निर्वाचन प्रक्रिया आगे बढ़ानी शुरू कर दी है. एक तरफ पुरानी प्रक्रिया के तहत निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा और प्रमाण पत्र वितरण हो चुका है, तो दूसरी ओर नयी समिति चुनाव कराने की तैयारी में जुट गयी है.
इससे झंझारपुर अधिवक्ता संघ का चुनाव और पेचीदा हो गया है. अब किस प्रक्रिया को वैध मान्यता मिलेगी, इस पर अधिवक्ताओं की निगाहें टिकी हैं. पूरे मामले में अंतिम स्थिति बिहार बार काउंसिल के अगले निर्देश के बाद ही स्पष्ट होने की उम्मीद है.
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