महोत्सव में नाटक के जरिए रंगकर्मियों ने दिया संदेश

सहज ही अंधविश्वास और पाखंड के प्रति आस्था उत्पन्न हो जाती है.

By Prabhat Khabar News Desk | March 9, 2025 6:31 PM

सिंहेश्वर, मधेपुरा. पर्यटन विभाग बिहार सरकार प्रायोजित जिला प्रशासन मधेपुरा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय सिंहेश्वर महोत्सव संपन्न ख्याति प्राप्त लोक गायिका कल्पना पटवारी के गीतों पर देर रात तक झूमे रहे लोग. इसी दौरान राष्ट्रीय महिला दिवस को ध्यान में रखते हुए प्रसार भारती एवं दूरदर्शन केंद्र पटना से ग्रेड प्राप्त कलाकार सह चर्चित रंगकर्मी एवं निर्देशक विकास कुमार निर्देशित सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक क्षेत्र में सक्रिय संस्था सृजन दर्पण के रंगकर्मियों ने ””आनंदी नामक नाटक का संदेश मूलक मंचन किया. नाटक के माध्यम से खासकर दिखाया गया कि शिक्षा के अभाव के कारण नायिका आनंदी में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी गलत अवधारणाएं बन जाती है. सहज ही अंधविश्वास और पाखंड के प्रति आस्था उत्पन्न हो जाती है. नवजात बच्चे की अशिक्षा के कारण असमय देहांत हो जाता है. नाटक के दूसरे हिस्से में आनंदी बैन जब पति की प्रेरणा से पढ़ाई शुरू कर अंततः डाक्टर बनकर विदेश से आती है तो बहुत से महिलाओं का उद्धारक बनती है. एक अशिक्षित अबोध बालिका से सुशिक्षित डाक्टर तक का संधर्षपूर्ण सफ़र उनके जीवनगाथा को समस्त बालिका के लिए प्ररेणा बना देती है. कैसे शिक्षा अंधविश्वास और पाखंड के कुहासा भरे लोक को खत्म कर जीवन-जगत के यथार्थ लोक को आलोकित करता है. इसकी अनुभूति हमें नाटक के बेहतरीन प्रस्तुति से सहज ही होता है. ऐसा विश्वास पैदा होता है ””बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का जन काल्याणकारी नारा बिल्कुल सही है. दर्शकों के हृदय में यही विश्वास पैदा करना संस्था एवं रंगकर्मी का उद्देश्य है. आनंदी एवं गोपालराव के किरदार को संध्या कुमारी और रंगकर्मी निखिल यदुवंशी ने अपने जीवंत अभिनय से मौजूद दशकों को भाव विभोर कर दिया. कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के निदेशक विकास कुमार, नैंसी कुमारी, कमलकिशोर यादव, मुस्कान कुमारी ने अहम भूमिका निभाई. मौके पर रंगकर्मी विकास कुमार ने बताया कि महिला को परिवार के केन्द्र में रहकर हकीकत की दुनिया में कई किरदार निभाना होता है. इसके अशिक्षित होने से इनमें कई गलतफहमियां विकसित हो जाती है, जिसका असर परिवार, समाज पर पड़ता है. वहीं इसकी शिक्षा इन्हें सबल बनाती है. फलत: परिवार और समाज सबल बनती है. नाटक में इसी समस्या को असरदार ढंग से दिखाया गया है. इस अवसर पर बड़ी संख्या में दर्शकगण मौजूद थे.

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