मधेपुरा में सफाई पर हर महीने लाखों खर्च, फिर भी खुले ट्रैक्टर में ढोया जा रहा कचरा; राहगीरों पर गिर रहा कूड़ा

मधेपुरा में लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद कचरा प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है. खुले ट्रैक्टरों में कचरा ढोने से यह उड़कर सीधे लोगों के ऊपर गिर रहा है, जिससे संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है.

शहर की घनी आबादी वाली सड़कों पर रोजाना हजारों लोगों का आना-जाना होता है. इनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं. ऐसे में जब खुले ट्रैक्टर में कचरा भरकर डंपिंग यार्ड ले जाया जाता है तो रास्ते में उड़ता कचरा सीधे लोगों के चेहरे और शरीर पर गिर रहा है. विडंबना यह है कि एक तरफ लोगों को स्वच्छता का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहर के मुख्य मार्गों पर कचरा बिखेरते हुए वाहन दौड़ रहे हैं.

हर दिन 8 से 10 टन कचरा, परिवहन में बड़ी लापरवाही

मधेपुरा शहर के 26 वार्डों से हर दिन करीब 8 से 10 टन कचरा निकलता है. नगर परिषद की ओर से कचरे के उठाव और डंपिंग यार्ड तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है. ट्रैक्टरों से विभिन्न कचरा प्वाइंट से कचरा उठाकर डंपिंग यार्ड तक पहुंचाया जाता है.

समस्या यह है कि कचरे को ट्रैक्टर में लोड करने के बाद उसे तिरपाल से ढका नहीं जाता. कई वाहनों का पीछे का ढक्कन भी खुला रहता है. ऐसे में रास्ते में वाहन के हिचकोले खाने पर कचरा सड़क पर गिरता जाता है.

पूर्णिया गोला से कॉलेज चौक तक उड़ता है कचरा

शहर के अलग-अलग कचरा प्वाइंट से कूड़ा उठाकर ट्रैक्टर पूर्णिया गोला, स्टेट बैंक रोड, कर्पूरी चौक, सुभाष चौक, कॉलेज चौक, पानी टंकी चौक सहित प्रमुख मार्गों से गुजरते हैं.

इन रास्तों पर कई विद्यालय और सार्वजनिक स्थल भी हैं. दिनभर इन सड़कों पर बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों की आवाजाही रहती है. खुले ट्रैक्टर से उड़ता कचरा लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है.

कई बार ट्रैक्टर के पीछे चल रहे बाइक सवारों और राहगीरों के चेहरे पर कचरे के टुकड़े और धूल-मिट्टी पहुंच जाती है. इससे लोगों को आंख और सांस से जुड़ी परेशानी होने की आशंका बनी रहती है.

सड़क के गड्ढे बढ़ा रहे समस्या

मधेपुरा की कई सड़कों की स्थिति भी लोगों से छिपी नहीं है. खराब और गड्ढों वाली सड़कों पर ट्रैक्टर के हिचकोले खाने से खुले में रखा कचरा और तेजी से सड़क पर गिरता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रैक्टर चालक कई बार तेज गति से वाहन लेकर निकलते हैं. इससे कचरा सड़क पर गिरने के साथ-साथ आसपास के लोगों और वाहनों पर भी पड़ता है. एक तरफ कचरा उठाने का उद्देश्य सफाई करना है, दूसरी तरफ परिवहन के दौरान वही कचरा सड़क पर फैल जाता है.

कार्यादेश में तिरपाल से ढककर ले जाने का प्रावधान

जानकारी के अनुसार नगर परिषद के कार्यादेश के बिंदु संख्या 15 में कचरे के परिवहन के दौरान ट्रैक्टर सहित अन्य वाहनों को तिरपाल से ढककर ले जाने का प्रावधान किया गया है. इसका उद्देश्य परिवहन के दौरान कचरा सड़क पर गिरने और उड़ने से रोकना है.

लेकिन शहर में इसका पालन होता नजर नहीं आ रहा है. पिछले महीने से सफाई व्यवस्था विभागीय स्तर पर संचालित होने की बात सामने आ रही है. इसके बावजूद कचरा परिवहन के दौरान निर्धारित नियमों का पालन नहीं किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं.

हर महीने करीब 30 लाख खर्च, फिर भी व्यवस्था पर सवाल

शहर की सफाई व्यवस्था पर नगर परिषद की ओर से हर महीने करीब 30 लाख रुपये खर्च किए जाने की बात कही जा रही है. इसके बावजूद कचरा उठाव और परिवहन के दौरान बरती जा रही लापरवाही ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरा उठाना ही पर्याप्त नहीं है. उसे सुरक्षित तरीके से डंपिंग यार्ड तक पहुंचाना भी सफाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यदि रास्ते में कचरा गिरता रहे तो शहर को स्वच्छ बनाने का उद्देश्य पूरा कैसे होगा?

नगर परिषद का दावा- कर्मियों को दिया जाता है निर्देश

नगर परिषद की ओर से बताया जाता है कि सफाई कर्मियों और वाहन चालकों को कचरा ढककर ले जाने का निर्देश बार-बार दिया जाता है. बावजूद इसके यदि वाहन चालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता है.

शहरवासियों का कहना है कि सिर्फ निर्देश जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. खुले में कचरा ढोने वाले वाहनों की नियमित निगरानी और लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई जरूरी है.

दुर्गंध के साथ संक्रमण का भी खतरा

खुले में कचरा परिवहन किए जाने से दुर्गंध की समस्या भी बढ़ रही है. कचरे में मौजूद धूल, गंदगी और अन्य अपशिष्ट हवा के साथ उड़कर लोगों के संपर्क में आ सकते हैं.

सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. यश शर्मा के अनुसार कचरे के संपर्क में आने से आंख, कान, गला, फेफड़ा और त्वचा प्रभावित हो सकती है. कचरे के कण नाक के जरिए शरीर में जाने पर स्वस्थ व्यक्ति भी बीमार पड़ सकता है. ऐसे में खुले ट्रैक्टर में कचरा ढोने की व्यवस्था स्वास्थ्य की दृष्टि से भी चिंता का विषय है.

लोगों का सवाल- आखिर कब बदलेगी व्यवस्था?

मधेपुरा के लोगों का कहना है कि शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए सिर्फ सफाई अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है. कचरे का उठाव, सुरक्षित परिवहन और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण भी जरूरी है.

लोगों की मांग है कि नगर परिषद खुले में कचरा ढोने वाले वाहनों पर तत्काल रोक लगाए, सभी वाहनों को तिरपाल से ढककर चलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करे और नियमों की अनदेखी करने वाले चालकों पर कार्रवाई करे.


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By Aman Kumar

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