सिंहेश्वर. बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज में सोमवार को संदिग्ध अवस्था में फंदे से लटकी मिली सिविल ब्रांच की छात्रा के शव को लेकर परिजनों ने कॉलेज प्रबंधन व पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया है. परिजनों ने आरोप है छात्रा की मौत की खबर कॉलेज प्रबंधन के द्वारा नहीं दी गयी. वहीं पुलिस ने शव बिना परिजन और मीडिया के ही फंदे से उतारा. वहीं घटना की जानकारी उसके रूममेट ने दी. रूममेट ने बताया कि छात्रा का शव फंदे से लटका हुआ है. इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी. वहीं दूसरी तरफ घटना के बाद पूरे कॉलेज परिसर में शोक और तनाव का माहौल बना हुआ था. देर रात मृतका के माता-पिता सहित अन्य परिजन मधेपुरा पहुंचे, जहां बेटी का शव देखकर मां का रो- रोकर बुरा हाल हो गया तीन छात्राएं रहती थीं एक ही कमरे में इधर, मामले में मृतका की रूममेट संध्या कुमारी ने बताया कि वे तीन छात्राएं एक ही कमरे में रहती थीं. सोमवार को दो बजे से क्लास थी, लेकिन खुशबू क्लास में नहीं पहुंची. साढ़े तीन बजे जब वह क्लास से लौटकर कमरे में आयी तो गेट अंदर से बंद था. दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद आसपास के सीनियर और बैचमेट्स को सूचना दी और फिर वार्डन को बुलाया. गार्ड्स द्वारा दरवाजा खुलवाने पर बालकनी के दरवाजे से खुशबू की शव फंदे से झूलती हुई मिली. संध्या ने बताया कि पिछले छह महीने से साथ रहने के दौरान खुशबू ने कभी किसी तरह की परेशानी या तनाव की बात साझा नहीं की थी और वह सामान्य व्यवहार में रहती थी. वहीं मृतका के पिता पवन सिंह जो मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र अंतर्गत मुरारलोचनपुर गांव के निवासी हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें बेटी की मौत की सूचना कॉलेज प्रशासन की ओर से नहीं, बल्कि उसकी रूममेट से मिली. उन्होंने कहा कि रविवार को उनकी बेटी से आखिरी बार बातचीत हुई थी और वह बिल्कुल सामान्य थी. 27 जनवरी को ही खुशबू घर से कॉलेज लौटी थी. सितंबर 2024 में उसने यहां एडमिशन लिया था और कभी किसी बात को लेकर कोई शिकायत नहीं की थी. पुलिस की कार्यशैली पर जताया आपत्ति परिजनों ने पुलिस व कॉलेज प्रबंधन की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि उनकी मौजूदगी के बिना ही शव को नीचे उतार दिया गया और पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी. परिजनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. मोबाइल से खुलेगा राज पुलिस ने मंगलवार की सुबह शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया. इससे पहले बंद कमरे में छात्रा की मौत कई सवाल खड़े कर रही है. फिलहाल पुलिस मृतका के मोबाइल फोन डिटेल्स, एफएसएल व पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच कर रही है. पूरे दिन रही पुलिस की गश्ती घटना के बाद से पुलिस लगभग पूरे रात मेडिकल कॉलेज में कैंप करती रही और उग्र हो रहे छात्रों को समझाती रही. जिला प्रशासन के द्वारा लगभग आधे दर्जन थानों से पुलिस बल को कॉलेज में बुला लिया, जबकि इसके अलावा दंगा रोधी दस्ता की संख्या भी 50 के पार रही. पुलिस द्वारा लगातार इस दिशा में कार्य किया जाता रहा कि बच्चे उग्र न हो. वहीं इंजीनियरिंग कॉलेज की गतिविधि को लेकर पुलिस लगातार गश्ती लगाती रही. छात्राओं को प्रिंसिपल ने समझाया-घटना के बाद से ही छात्रावास की छात्राएं डरी और सहमी रही और दिन में कुछ छात्राएं घर जाने की जिद पर खाना नहीं खाया. इसकी सूचना के बाद प्रिंसिपल अमरेंद्र कुमार अमर ने छात्रावास में पहुंचकर छात्रा को समझाया कि जो होना था हुआ. पूरे छात्रावास में कॉलेज कर्मियों की संख्या को दोगुना कर दिया गया. किसी को डरने की आवश्यकता नहीं है. प्रिंसिपल ने बताया कि मृतका छात्रा के रूममेट को फिलहाल घर भेजा गया है. जिससे वह सामान्य हो सके. बताया कि रूममेट का सारा सामान रूम में ही प्रशासन ने सिल कर दिया है.
इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में मिले छात्रा के शव को ले परिजनों ने कॉलेज प्रबंधन व पुलिस पर लगाया सूचना नहीं देने का आरोप
इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में मिले छात्रा के शव को ले परिजनों ने कॉलेज प्रबंधन व पुलिस पर लगाया सूचना नहीं देने का आरोप
