मधेपुरा में मच्छरों से त्राहिमाम, फॉगिंग मशीन पर जमी धूल, नगर परिषद की उदासीनता से बढ़ी परेशानी

Madhepura News: मधेपुरा मं रात तो दूर, अब दिन में भी मच्छरों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में लोग दिन के समय भी मच्छरदानी लगाने को मजबूर हैं. सवाल यह है कि नगर परिषद की फॉगिंग मशीन आखिर कब सड़कों पर उतरेगी?

मधेपुरा से अमन श्रीवास्तव की रिपोर्ट

Madhepura News: मधेपुरा शहर में इन दिनों मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. शहर के अधिकांश मोहल्लों में मच्छरों की भरमार से लोग परेशान हैं, लेकिन नगर परिषद की ओर से फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव जैसी जरूरी कार्रवाई नहीं होने से स्थिति और गंभीर होती जा रही है. नागरिकों का आरोप है कि फॉगिंग मशीन नगर परिषद परिसर में धूल फांक रही है, जबकि शहरवासी मच्छरों के आतंक से जूझ रहे हैं.

शाम होते ही घरों से बाहर निकलना हो रहा मुश्किल

शहर के विभिन्न इलाकों में शाम ढलते ही मच्छरों का हमला शुरू हो जाता है. पार्क, चौक-चौराहों और घरों के बाहर बैठना मुश्किल हो गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मच्छरों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि दिन में भी राहत नहीं मिल रही. पढ़ाई करने वाले बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

कई परिवारों का कहना है कि अब मच्छरों से बचने के लिए दिन में भी मच्छरदानी का सहारा लेना पड़ रहा है.

क्वायल और अगरबत्ती भी नहीं दे पा रहे राहत

फॉगिंग नहीं होने के कारण लोग अपने स्तर पर मच्छर भगाने के उपाय कर रहे हैं. कोई क्वायल जला रहा है तो कोई मच्छररोधी अगरबत्ती और लिक्विड मशीन का इस्तेमाल कर रहा है. इसके बावजूद मच्छरों का प्रकोप कम नहीं हो रहा.

लोगों का कहना है कि निजी खर्च बढ़ने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिल रही है और नगर परिषद की ओर से कोई ठोस पहल नहीं दिखाई दे रही.

गंदगी और जाम नाले बढ़ा रहे संकट

शहर के कई इलाकों में नालों का गंदा पानी जमा है. जगह-जगह कचरे का अंबार और जलजमाव की समस्या बनी हुई है. स्थानीय लोगों के अनुसार सफाईकर्मियों की नियमित उपस्थिति नहीं होने से हालात और बिगड़ रहे हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि गंदगी और रुके हुए पानी में मच्छरों का तेजी से प्रजनन होता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

कार्रवाई की मांग तेज

शहरवासियों ने नगर परिषद से तत्काल फॉगिंग अभियान शुरू करने, कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराने और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां गंभीर रूप ले सकती हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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