चौसा को अनुमंडल बनाने की मांग तेज

चौसा को अनुमंडल बनाने की मांग तेज

चौसा .

मिथिलांचल, सीमांचल व अंग जनपद के त्रिवेणी संगम पर अवस्थित चौसा प्रखंड को अनुमंडल बनाने की वर्षों पुरानी मांग अब जोर पकड़ रही है. राजनीतिक व तकनीकी कारणों से यह मांग अभी तक पूरी नहीं हो सकी है, लेकिन स्थानीय लोग अब इसे लेकर अधिक सक्रिय हो गये हैं. इसी सिलसिले में शुक्रवार को चौसा पश्चिमी पंचायत स्थित आदर्श नगर में अपना चौसा बैनर तले बैठक की. अधिवक्ता विनोद आजाद के आवास पर हुई. बैठक में चौसा को अनुमंडल का दर्जा देने की मांग को लेकर व्यापक चर्चा की गयी. अधिवक्ता आजाद ने कहा कि 10 दिसंबर 1957 को चौसा को प्रखंड का दर्जा मिला था, लेकिन लगभग 70 साल बाद भी यह शासन की नजर में आकांक्षी प्रखंड बना हुआ है, जो स्थानीय लोगों के लिए शर्मनाक है. उन्होंने कहा कि अब इस उपेक्षा को सहन नहीं किया जाएगा और चौसा को अनुमंडल बनाने तक संघर्ष जारी रहेगा.

बनने की सभी योग्यताएं रखता है चौसा अनुमंडल

साहित्यकार संजय कुमार सुमन ने कहा कि चौसा प्रखंड अनुमंडल बनने की सभी योग्यताएं पूरी करता है. उन्होंने चौसा की ऐतिहासिक, धार्मिक, शैक्षणिक व राजनीतिक महत्ता को रेखांकित करते हुए बताया कि यहां पॉलिटेक्निक,महाविद्यालय, आईटीआई औद्योगिक संस्थान और दो पावर हाउस पहले से मौजूद हैं, जबकि एक पावर हाउस, पॉवर ग्रिड और अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय निर्माणाधीन हैं. उन्होंने यह भी बताया कि विगत दो वर्षों में इस मांग को लेकर कई धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किये गये, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते यह मांग सरकारी फाइलों में दबकर रह गयी है. सुव्यवस्थित प्रशासन व विकास के लिए अनुमंडल का दर्जा जरूरी है.. बैठक में यहिया सिद्दीकी व कुंदन घोषईवाला ने कहा कि चौसा एनएच-106 व एसएच-57 से जुड़ा हुआ है. जिससे यह राजधानी पटना, नेपाल, झारखंड व पश्चिम बंगाल तक सीधा संपर्क रखता है. प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी चौसा को अनुमंडल का दर्जा मिलने से स्थानीय विकास को गति मिलेगी और सरकारी कार्यों में तेजी आयेगी.

संघर्ष की नई रणनीति, तदर्थ समिति का गठन

बैठक में सर्वसम्मति से संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए एक तदर्थ समिति का गठन किया गया. इसमें अजय कुमार खुशबू को संयोजक बनाया गया, जबकि कुंदन घोषईवाला, वीरेंद्र कुमार वीरू, सुनील अमृतांशु और राहुल कुमार यादव को नामित किया गया. बैठक में शामिल प्रमुख व्यक्तियों में साहित्यकार संजय कुमार सुमन, यहिया सिद्दीकी, पत्रकार संजय कुमार, मनीष अकेला, कुमार साजन, अंसार आलम, शहंशाह कैफ, गुलजार रजा, शिक्षक व समाजसेवी रंजीत कुमार, सआदत हसन, जवाहर चौधरी, नीतीश कुमार, कुंजबिहारी शास्त्री, प्रभाष सारथी व अमित कुमार ठाकुर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे. बैठक के अंत में चौसा को अनुमंडल का दर्जा दिलाने के लिए संगठित संघर्ष करने का संकल्प लिया गया और कहा गया कि यदि सरकार जल्द निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और तेज किया जायेगा.

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