दो नवंबर 1996 को दोस्तों ने कर दी थी विपिन की हत्या
मधेपुरा : एडीजे तृतीय न्यायाधीश रमण कुमार की अदालत ने मंगलवार को हत्या के एक मामले में पवन कुमार व नवल कुमार को आजीवन कारावास व पचास हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनायी. बभनगामा निवासी सत्येंद्र कुमार यादव का 15 वर्षीय पुत्र विपिन कुमार दो नवंबर 1996 को अपने दोस्तों के साथ घुमने गया था. वह घर नहीं लौटा, तो उसके परिवार वालों ने अपने रिश्तेदारों के यहां काफी खोजबीन की.
जब विपिन का कुछ पता नहीं चला, तो मुरलीगंज थाना में अपने पुत्र के अपहरण का मामला दर्ज करवाया. दो दिन बाद चार नवंबर को गांव से सटे नदी के किनारे कुछ खून के धब्बे मिले. काफी खोजबीन करने के बाद अरार घाट के डेफरा गांव के पास विपिन का शव मिला. उसका हाथ बांध दिया गया था और धारदार हथियार से गरदन और पेट में वार कर उसकी हत्या कर दी गयी थी.
इस मामले में विपिन के तीन दोस्त पवन कुमार,
नवल कुमार व मिथिलेश कुमार को नामजद करते हुए अपहरण व हत्या का मामला दर्ज कराया गया था. मामले में 20 वर्षों के बाद अदालत ने मिथिलेश को निर्दोश करार देते हुए बरी कर दिया. वहीं पवन कुमार व नवल कुमार को हत्या कर साक्ष्य मिटाने के आरोप में दोषी पाते हुए सजा सुनायी.
