मुश्किल है, पर असंभव नहीं मुंह की लगी का छूटना

मधेपुरा : पूर्ण शराब बंदी की घोषणा भले ही सरकार ने की हो. लेकिन समाज का सभी वर्ग एकजुटता के साथ नशा के विरुद्ध मौन क्रांति आगाज कर चुका है. स्थिति ऐसी की पान के दुकान पर सिगरेट पीने और पान मसाला खाने वालों को भी अब सब मिलकर टोकने लगे है. आम तौर पर […]

मधेपुरा : पूर्ण शराब बंदी की घोषणा भले ही सरकार ने की हो. लेकिन समाज का सभी वर्ग एकजुटता के साथ नशा के विरुद्ध मौन क्रांति आगाज कर चुका है. स्थिति ऐसी की पान के दुकान पर सिगरेट पीने और पान मसाला खाने वालों को भी अब सब मिलकर टोकने लगे है. आम तौर पर खुलेआम बिकने वाले भांग की बिक्री भी अब चुपचाप हो रही है

रासबिहारी खेल मैदान के एक कौने में रोज होने वाला धुआं पार्टी के युथ मेंबर कई दिनों से मैदान से गायब नजर आ रहे हैं. कुल मिलाकर देखें तो नशा मुक्त समाज निर्माण की चेतना आम लोगों में जग चुकी है. वहीं शराब बंदी के प्रति जिला प्रशासन के कड़े रूख से अवैध करोबारियों में भय का माहौल बना हुआ है.

गुरूवार को एएसपी राजेश कुमार के नेतृत्व में मधेपुरा पुलिस विभिन्न थाना क्षेत्रों में लगातार छापामारी अभियान चलाकर अवैध शराब के खेप को जब्त करती रही. वहीं नियमित रूप से शराब या अन्य नशा का सेवन करने वाले लोग भी नशा की लत को छोड़ कर जीवन के तरफ लौटने लगे है.

चार अप्रैल से अब तक आठ लोग सदर अस्पताल के आउट डोर में संचालित काउंसलिंग के लिए पहुंच चुके है. हैरत है कि इन्हें कोई लेकर नहीं पहुंचा. यह खुद काउंसलर के पास पहुंच कर नशा छोड़ने की मंशा जाहिर किये. काउंसलर ने इन्हें प्रोत्साहित करते हुए नशा बंदी के प्रति जागरूक किया.
स्थिति है कि सभी आठ लोग नशा छोड़ कर रोज काउंसलर से सलाह मशवरा कर रहे है. काउंसलर सुधा संध्या ने इन सभी आठ लोगों का नाम और पहचान गुप्त रखने की शर्त पर जो कहानी बताई वह कुछ यूं है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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