मानसून व बाढ़ की मार से बर्बाद हुई फसल, ₹10 के बजाय ₹40 प्रति किलो तक पहुंचा भाव
लखीसराय. इस वर्ष टमाटर की लाली का प्रभाव बाजार में नहीं दिख रहा है. बाजार में पिछले वर्ष टमाटर का भाव काफी गिरा हुआ था. टमाटर बाजार में इतना सस्ता हो चुका था कि किसानों को ट्रांसपोर्ट व टमाटर तोड़ने की मजदूरी भी नहीं निकलती थी, जिसके कारण किसान टमाटर को खेत में ही छोड़ देते थे. प्रत्येक साल बड़हिया का दरियापुर, सदर प्रखंड के साबिकपुर, रेहुआ, रामचंद्रपुर, वलीपुर आदि गांवों के खेतों में पिकअप वैन पहुंचती थी. खेत से ही टमाटर लोड होकर दूसरे जिलों में निर्यात के लिए निकल पड़ता था. बिहार के उत्तरी व दक्षिणी जिलों में टमाटर का निर्यात यहीं से होता था. लेकिन इस वर्ष देर तक मानसून रहने के कारण टमाटर की खेती चौपट हो गयी है. किसान के खेत में जब बिचड़ा गिराया गया, तो जिले में दोबारा बाढ़ आ गयी व सब्जियों के बिचड़े अपने साथ बहा ले गयी. इससे किसानों को बदहाली के मंजर में धकेल दिया गया. वर्तमान में 10 रुपये प्रति किलो बिकने वाला टमाटर अब 30 से 40 रुपये प्रति किलो की दर से बाजार में बिक रहा है. इसका मूल वजह यह है कि इस बार कम किसानों के द्वारा बिचड़ा लगाया गया. यही कारण है कि बाजार में कम मात्रा में ही टमाटर उपलब्ध है. लोग इसे महंगी दर पर खरीदने को मजबूर हैं.